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शुक्र का संबंध वैवाहिक जीवन, ऐशो आराम तथा सुख से होता है। शुक्र के प्रभाव से जातक को समस्त जीवन के सुखो की प्राप्ति होती है। शुक्र वृषभ और तुला राशि का स्वामी है, वही मीन उच्च तो कन्या नीच राशि मानी जाती है। शुक्र ग्रह जातक के किस भाव में बैठे है यह बहुत मायने रखता है। शुक्र लगभग एक महीने तक ही किसी राशि में रहते है, इसलिए शुक्र किसी राशि में जितने समय के लिए रहते है उस भाव के अनुसार जातक का भविष्यफल भी प्रभावित होता है। गोचर का समय 4 अक्टूबर शुक्रवार के दिन शुक्र प्रातः 4 बजकर 56 मिनिट पर कन्या राशि को छोड़कर तुला राशि में गोचर कर रहे है, शुक्र 28 अक्टूबर सोमवार को प्रातः 8 बजकर 12 मिनिट तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। आइये जानते है शुक्र के इस गोचर का 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है। मेष राशि पर प्रभाव – शुक्र का राशि परिवर्तन आपकी राशि से सप्तम भाव में हो रहा है। प्रोफेशनल क्षेत्र में आपको अच्छी सफलता मिल सकती है। इस गोचर के दौरान आपको सावधान रहने की सलाह यहाँ दी जाती है। गृहस्थ जीवन में किसी बात को लेकर मनमुटाव देखने को मिल सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर नाराजगी देखने को मिलेगी। कामकाज में उच्च पद पर विराजमान लोगों से सम्बन्ध खराब हो सकते है। आप अपनी तरफ से हमेशा प्रयत्नशील रहेंगे। धन हानि के संकेत मिल रहे है। यह गोचर आपके लिए सामान्य रहनेवाला है। पैसों का लेनदेन करते समय सावधानी बरते अन्यथा धोखा मिल सकता है। वृषभ राशि पर प्रभाव – शुक्र आपकी राशि से छठे भाव अर्थात शत्रु भाव में गोचर कर रहे है। स्वास्थ्य से सम्बंधित दिक्कते इस दौरान हो सकती है। अपने सेहत के प्रति जागरूक रहे। इस गोचर में कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है। दाम्पत्य जीवन में कलह बना रहेगा। कामकाज के क्षेत्र में किसी से विवाद हो सकता है। यात्राएँ भी होंगी परन्तु वो फलदायी नहीं होंगी इसलिए यात्रा करने से परहेज करें। अगर छात्र मेहनत करते है तो अवश्य ही उनको मेहनत का फल मिलेगा। धन का दुरूपयोग हो सकता है, कर्ज जैसी स्थिति उत्पन्न होने के कारण मन में उदासीनता बनी रहेगी। अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें मिथुन राशि पर प्रभाव –   शुक्र आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहे है। इस गोचर में नवीनतम कार्य संपन्न होंगे तथा इस अवधि में संतान से भरपूर प्रेम तथा सम्मान मिलेगा। अगर किसी को पसंद करते है तो अपने प्यार का इजहार करने के लिए उत्तम समय है। प्रेम संबंधों में रोमांस बढ़ेगा। छात्रों के लिए यह गोचर अच्छा है। प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में सफलता मिलेगी। धन प्राप्ति के नवीन अवसर मिलेंगे। सरकारी नौकरी की तलाश में जुटे लोगों को सरकारी नौकरी मिलने की सम्भावना है। धन की स्थिति उत्तम बनी रहेगी। बौद्धिक क्षमता का विकास होगा। कर्क राशि पर प्रभाव – शुक्र आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहे है। यह सुख का भाव होता है। यह गोचर प्रॉपर्टी या नवीन वाहन खरीदने के लिए उत्तम है। माता की सेहत उत्तम बनी रहेगी। पारिवारिक सुख की अनुभूती होगी। कोई काम अगर बहुत दिनों से अटका हुआ है तो वह इस गोचर में पूर्ण होगा। अपने सगे-सम्बन्धियों का साथ मिलेगा। सुख-संपत्ति में इजाफ़ा होगा। कामकाज की तलाश में भटकने वाले लोगों को काम के नवीन अवसर मिलेंगे। अपने नियमित व्यवहार में मधुरता बनाए रखे, क्रोध न करें, समय आपके हित में रहेगा।      सिंह राशि पर प्रभाव  – तृतीय भाव में शुक्र का गोचर आपके धन में वृद्धि का कारण बनेगा। इसे सहज भाव कहते है। साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। समाज में मान -सम्मान बढेगा। सहकर्मी आपका भरपूर साथ देंगे। पारिवारिक सुख मिलेगा। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखे तथा किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें। धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ेगी। कुल मिलाकर यह गोचर आपके लिए अच्छा है। यात्रा करते समय सावधनी बरतें। कन्या राशि पर प्रभाव – शुक्र का यह गोचर आपकी राशि से द्वितीय भाव में हो रहा है। धन प्राप्ति के अनेक अवसर इस गोचर में आपको मिलेंगे। महंगी चीजे आप इस गोचर में क्रय कर सकते है। खर्चे बढ़ेंगे उसी अनुपात में धन भी मिलेगा।  प्रेम संबंधों के लिए बेहतर समय है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखनेवाले लोगों के लिए समय अनुकूल है। छात्रों को मेहनत का फल अवश्य मिलने वाला है। छात्र परिश्रम करना न छोड़े। परिवार में प्यार और एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना देखने को मिलेगी। तुला राशि पर प्रभाव – शुक्र का गोचर आपकी राशि में हो रहा है। यह गोचर जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ रहा है। आप ऐशोआराम की वस्तुओं पर ज्यादा धन खर्च करेंगे। नया घर या वाहन का क्रय होने की सम्भावना है। शत्रु आपसे भयभीत रहेंगे। आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहेगी। संतान सुख की प्राप्ति होगी। कामकाज में नयापन देखने को मिलेगा। छात्रों को मनवांछित फल मिलेंगे। यह शुक्र का गोचर तुला राशि के लोगों के लिए अच्छा है। वृश्चिक राशि पर प्रभाव – शुक्र का राशि परिवर्तन आपकी राशि से 12 वें भाव में हो रहा है। यह भाव व्यव भाव होता है। इस गोचर के दौरान धन लाभ होगा। खर्चों में भी वृद्धि होगी। आप भौतिक सुख-सुविधाओं का लाभ उठाएंगे। पति-पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध स्थापित होंगे। व्यापारियों को लाभ होगा। कुल मिलाकर शुक्र का यह गोचर आपके लिए अच्छा ही है। इस गोचर में विदेश यात्रा होने के संकेत मिल रहे है, लम्बी दूरी की यात्राएं भी होने की सम्भावना इस गोचर में बनी हुई है। अपने शत्रुओं से बचकर रहे हो सकता है, आपको परेशान करने के लिए वो कुछ विपरीत हरकतें करें।   अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें धनु राशि पर प्रभाव – शुक्र का यह गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में हो रहा है। यह आमदनी का भाव कहा जाता है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए यह गोचर अच्छा है। इस समय विभिन्न स्रोतों से धन का आगमन होगा। दाम्पत्य जीवन में सुख की अनुभूती होगी, रोमांस के लिए अच्छा समय है। मित्रों का अच्छा सहयोग मिलेगा। उधार दिया हुआ धन वापिस आ सकता है। पारिवारिक सुख मिलेगा। यात्रा करने के लिए भी समय अच्छा है। व्यवहार में विनम्रता रखें, बेवजह किसी से भी न उलझे। व्यापार-व्यवसाय में धन लाभ होगा। किसी पुराने मित्र से मिलकर मन प्रसन्न रहेगा। मकर राशि पर प्रभाव – शुक्र का यह गोचर आपकी राशि से दशम भाव में हो रहा है। इस गोचर में कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियों का निर्वाह अच्छे से करने में विफल हो सकते है। पैसों का लेनदेन करते समय सावधनी बरतें। पारिवारिक कलह मानसिक अशांति उत्पन्न कर सकते है। अपने क्रोध पर नियंत्रण रखे। इस गोचर के दौरान शत्रुओं की संख्या में वृद्धि हो सकती है। कामकाज में अपने सीनियर्स के साथ सम्बन्ध अच्छे रखे अन्यथा दिक्कते हो सकती है। मकर राशि के लोगों के लिए यह समय सामान्य रहने वाला है। कुंभ राशि पर प्रभाव – शुक्र का राशि परिवर्तन आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है। यह गोचर छात्रों के लिए सफलता लेकर आ रहा है परन्तु परिश्रम की आवश्यकता है। नवीन वस्तुओं का क्रय आपके द्वारा होगा। भाग्य का आपको भरपूर साथ मिलनेवाला है। धार्मिक कार्य में आपकी रूचि बन सकती है। आपकी सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी। किसी बात को लेकर असमंजस्य की स्थिति बनी रहेगी। धन का लेनदेन सोच-समझकर करें अन्यथा परेशानी उत्पन्न हो सकती है। रुका हुआ धन मिलने के संकेत मिल रहे है। मीन राशि पर प्रभाव  – शुक्र का राशि परिवर्तन आपकी राशि से अष्टम भाव में हो रहा है। इस भाव को आयुर्भाव भी कहा जाता है। संतान का अच्छा सुख मिलेगा। कामकाज हो या व्यवसाय धन लाभ जरुर होगा। यह गोचर आपके भाग्य को बदलने वाला है। स्वास्थ्य खराबी परेशानी का कारण बन सकता है। छात्रों को इस गोचर में सफलता अवश्य मिलेगी। जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे है उनके लिए भी यह गोचर उत्तम है। इस समय खर्चों में वृद्धि होगी। मन में कामभावना उत्पन्न होंगी परन्तु अपने मन को काबू में रखना ही आपके हित में रहेगा। शत्रुओं से सावधान रहे। यात्रा करते समय सतर्क रहे। अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook The post शुक्र का तुला राशि में गोचर, जानिये आप पर क्या होगा इस गोचर का प्रभाव appeared first on AstroVidhi. ..read more
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शुभ मुहूर्त पूर्णिमा आरम्भ – 13 अक्टूबर 2019 को 12:38:45 ..read more
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29 सितंबर 2019 रविवार के दिन दोपहर 12 बजकर 41 ..read more
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अश्विन मास के महीने में आने वाली सर्वपितृ अमावस्या सबसे ख़ास मानी जाती है। इस दिन पितृ अपने घर के प्रिय लोगों से श्राद्ध की इच्छा से उनके पास आते है अगर कोई पितरों का श्राद्ध नहीं करता तो उन्हें अपने पूर्वजों का श्राप मिलता है इसके कारण उस व्यक्ति तथा परिवार पर अनेक प्रकार की मुसीबतें आनी शुरू हो जाती है। 28 सितम्बर 2019 शनिवार के दिन सर्वपितृ अमावस्या है, इसी दिन शनि अमावस्या का महासंयोग बन रहा है जो की बहुत ही सौभाग्यशाली है। सर्वपितृ अमावस्या का महत्व शास्रों के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या का बहुत अधिक महत्व है। इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है। जो लोग अपने पितरों के मृत्यु को प्राप्त होने की तिथि नहीं जानते या फिर किसी कारणवश श्राद्ध कर्म को पूरा नहीं कर पाए या फिर उनके पास श्राद्ध कर्म करने का समय नहीं था या कोई जरुरी काम आ गया हो, वह लोग पितृ पक्ष की अमावस्या के दिन अपने पितरों का घर पर या किसी मंदिर, तालाब या नदी के किनारे या किसी पेड़ के नीचे जाकर श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। इस दिन श्राद्ध करने के पीछे मान्यता है कि इस दिन पितरों के नाम की धूप देने से उनका तर्पण करने से मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। जीवन में उत्पन्न सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते है। मान्यता है की इस अमावस्या को पितृ अपने प्रियजनों के द्वार पर श्राद्धादि की इच्छा लेकर आते है, यदि उनको पिंडदान न मिले तो शाप देकर चले जाते है, जिसके फलस्वरूप पारिवारिक कलह बढ़ जाते है, जीवन में असफलताओं का सामना करना पड़ता है इसलिए श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए। किसी जातक की कुंडली में अगर पितृ दोष है, तो इस दिन पितृ दोष निवारण पूजा जरुर करनी  चाहिए। पितृ तर्पण का शुभ मुहूर्त वर्ष 2019 में पितृ पक्ष की शुरुआत 13 सितंबर से हो रही है और सर्वपितृ अमावस्या 28 सितंबर को है। इस अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने का शुभ मुहूर्त प्रातःकाल 7 बजकर 43 मिनिट से 9 बजकर 13 मिनिट तक है।     अभी पित्र दोष निवारण पूजा करवाएं श्राद्ध कर्म करने की विधि सर्वपितृ अमावस्या के दिन प्रात:काल जल्दी उठकर नित्य कर्म करने के बाद स्नानादि के पश्चात गायत्री मन्त्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिए, उसके बाद अपने पितरों को याद करते हुए घर में पितरों के पसंद के पदार्थ भोजन में बनाए। बनाये गए भोजन से गाय, कुत्ते, कौए, देव और चींटियो के लिए भोजन का अंश निकालकर उन्हें देना चाहिए। इसके पश्चात अपने पितरों का तर्पण करते हुए अपने परिवार की मंगल की कामना करनी चाहिए तथा पितरों का आशीर्वाद लेना चाहिए, अपने द्वारा कोई भूल हुई है उसकी क्षमा मांगनी चाहिए। योग्य ब्राह्मण या किसी गरीब जरूरतमंद को भोजन करवाना चाहिए तथा अपने सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा भी देनी चाहिए। पितृ मन्त्र अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन पितृ मन्त्र का उच्चारण अवश्य करना चाहिए। पितृ अमावस्या के दिन घर के सभी पुरुष श्राद्ध कर्म करते समय वहां उपस्थित हों और सभी निम्न मन्त्रों का उच्चारण करते हुए श्रद्धापूर्वक अपने पितरों का नमन करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। ॐ पितृ देव नमः ॐ पितृ दैवतायै नमः ॐ कुल दैवतायै नमः ॐ कुल कुलदैव्यै नमः ॐ नाग दैवतायै नमः अभी पित्र दोष निवारण पूजा करवाएं संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook The post सर्वपितृ अमावस्या 2019- इस दिन करें पितृ दोष निवारण पूजा appeared first on AstroVidhi. ..read more
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दुनिया में परिवार सुख से बढकर कोई सुख नहीं है। परिवार एक गुलदस्ते की तरह होता है, जिस तरह से एक गुलदस्ते में अलग अलग रंगों के फूल होते है, उसी प्रकार परिवार में भी अलग अलग लोग होते है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसका सुखी संसार हो, परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, आदर और सहयोग की भावना हो, परिवार एक दूसरे का ख्याल रखे तथा अपना घर किसी स्वर्ग से कम न हो परन्तु इन रिश्तों में गलतफहमी तथा मनमुटाव होने से पूरे परिवार की शांति भंग हो जाती है और इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। क्यों करें गृह क्लेश शांति पूजा किसी भी जातक की कुंडली में स्थित अशुभ ग्रहों की चाल इंसान के जीवन में तथा घर में इस कदर हावी हो जाती है की इंसान घर से दूर भागने की सोचता है, राक्षसी प्रवृत्ती का हो जाता है, रोजमर्रा के हिंसात्मक लड़ाई-झगडे, घर में कलह, धन की कमी और बेवजह उत्पन्न होने वाले कलह से छुटकारा पाने के लिए ही ग्रह शांति पूजा की जाती है। अगर आप भी घर-परिवार में ऐसी स्थिति का सामना कर रहे है, तो आप जल्दी ही गृह-क्लेश शांति पूजा करवाए और रोज रोज के कलह से मुक्ति पाएं। पूजन का महत्‍व गृह क्लेश शांति पूजा कराने से आपके घर के कलह दूर हो जाते है, सभी महत्‍वपूर्ण कार्य संपन्‍न होते हैं। इस पूजा के प्रभाव से आपके जितने भी रुके हुए काम हैं वो पूरे हो जाते हैं। शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं। कुंडली में जो ग्रह घर की अशांति के लिए जिम्मेदार है, उनके अशुभ प्रभाव को पूजा द्वारा कम किया जाता है। हिंसात्मक प्रवृत्ति का खात्मा हो जाता है। अभी ग्रह क्लेश शांति पूजा करवाएं गृह क्लेश शांति पूजा के लाभ गृह क्लेश से वाले छुटकारा किसी योग्य पंडित द्वारा यह पूजा करवाने से घर-परिवार में उत्पन्न होने वाले कलह से मुक्ति मिलती है। कई बार परिवार में आपस में मतभेद या एक- दूसरे के विचारों से सहमत न हो पाने के कारण परिवार के सदस्यों में बहस छिड जाती है, चाहे वो फिर पति-पत्नी के बीच हो, सास- बहू के बीच हो, भाई-भाई के बीच हो, ननद-भाभी हो या जेठानी-देवरानी के बीच में हो, जिसके कारण पारिवारिक अशांति का वातावरण देखने को मिलता है, यह लड़ाई-झगड़े विक्राल रूप ले सकते है। इन सबसे छुटकारा पाने के लिए ही गृह क्लेश शांति पूजा करवाई जाती है। इस पूजा के प्रभाव से घर में सुख-शांति देखने को मिलती है तथा परस्पर संबंधों में मधुरता आती है। मानसिक शांति की प्राप्ति घर में अगर आपस में ही रोज-रोज कलह, लड़ाई-झगड़े होते है, तो इसका बुरा असर मस्तिष्क पर पड़ता है, सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है तथा जातक मानसिक तनाव में आ जाता है जिसका असर उसके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है परन्तु इस पूजा के प्रभाव से मानसिक शांति मिलती है तथा बेवजह की चिंताओं से मुक्ति मिलती है। हिंसात्मक प्रवृत्ति का खात्मा लड़ाई-झगड़ा करना, घर में आपस में ही कलह करना, मारपीट करना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, ऐसे में जातक हिंसात्मक प्रवृत्ति का हो जाता है, गुस्से में आकर वो कोई दुर्घटना भी कर सकता है या किसी को मार भी सकता है, परन्तु गृह क्लेश शांति पूजा करवाने से आपस में प्रेम भावना विकसित होती है, क्रोध पर भी नियन्त्रण रखने में जातक कामयाब होता है तथा हिंसात्मक प्रवृत्ति का खात्मा हो जाता है। धन-धान्य में बरकत हम सभी जानते है की जिस घर में सुख-शांति होती है, वहां धन की देवी लक्ष्मी का वास होता है और जिस घर में आयें दिन कलेश होते है उस घर में लक्ष्मी कभी नहीं आती। जीवन दरिद्रता में व्यतीत हो जाता है परन्तु गृह क्लेश शांति पूजा करवाने से घर में बरकत होती है, साथ साथ कामकाज में भी अच्छा लाभ देखने को मिलता है। धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर आपके लिए धन आगमन के मार्ग प्रशस्त करवाती है।    अभी ग्रह क्लेश शांति पूजा करवाएं संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook The post रोज रोज के गृह-क्लेश से है परेशान जो जल्दी करें ये उपाय appeared first on AstroVidhi. ..read more
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भारतीय संस्कृति में हर त्यौहार का अपना एक अलग और ख़ास महत्व है और हर त्यौहार अपने साथ बेहतर जीवन जीने का एक अलग सन्देश देता है। उनमे से एक है दशहरा इस दिन शमी वृक्ष की पूजा का ख़ास महत्व है। घर आँगन में पेड़ पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना हमारे हिन्दू धर्म की बहुत प्राचीन परंपरा है। धार्मिक नजरिये से देखा जाए तो कई पेड़ बहुत ही महत्वपूर्ण माने गये है, इनमे औषधीय गुणों के साथ साथ भगवान का आशीर्वाद भी होता है। शमी का वृक्ष भी ऐसे ही वृक्षों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में शमी का पेड़ लगाने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। शमी का वृक्ष शनि के प्रकोप से भी बचाता है।  क्या है पौराणिक मान्यता पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दशहरे पर शमी के वृक्ष की पूजन की परंपरा हमारे यहाँ प्राचीन समय से चली आ रही है। ऐसी मान्यता है की मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी ने शमी वृक्ष के सामने शिश नवाकर पूजा अर्चना की थी और अपनी विजय की प्रार्थना की थी इसलिए इस वृक्ष को बहुत ही पवित्र तथा मंगलकारी माना गया है। दशहरे की दिन शमी वृक्ष का पूजन जल और अक्षत के साथ किया जाता है। नवरात्रि के पावन पर्व पर भी माँ दुर्गा का पूजन शमी वृक्ष के पत्तों से करने का विधान है। गणेश जी और शनिदेव दोनों को ही शमी बहुत प्रिय है। कहते है शमी का वृक्ष घर के ईशान कोण में लगाना सबसे उत्तम होता है, इसमें प्राकृतिक तौर पर अग्नि तत्व पाया जाता है। शमी वृक्ष तेजस्विता एवं साहस का प्रतीक है जिसमे अग्नि तत्व की मात्रा होती है, इसी कारण यज्ञ में अग्नि प्रकट करने हेतु शमी की लकड़ी के उपकरण बनायें जाते है। महाभारत काल में भी पांडवों ने देश निकाला के अंतिम वर्षों में हथियार शमी वृक्ष में ही छिपायें थे, और इन्ही हथियारों से कौरवों पर विजय हासिल की थी इसलिए भी इस वृक्ष की मान्यता है।    अभी अभिमंत्रित गोमेद रत्न प्राप्त करें शनि ग्रह और शमी वृक्ष का सम्बन्ध शनि ग्रह न्याय करने वाला ग्रह है, इसलिए इसे न्याय का देवता कहा जाता है। शनि को काला रंग,सरसों का तेल और काली उड़द अतिप्रिय है साथ ही साथ शमी का वृक्ष भी प्रिय है। हम जो भी अच्छे-बुरे कर्म करते है उसके पीछे शनि देव का हाथ होता है। यदि किसी जातक की कुंडली में शनि अच्छे भाव में बैठे है तो जातक ऊँचाइयों को छू लेता है, इसके विपरीत अगर शनि बुरे भाव में बैठे है तो जातक को दरिद्रता में जीवनयापन करने के लिए मजबूर कर देते है। शमी के पेड़ की पूजा करने से शनि देव प्रसन्न हो जाते है और शनि देव का आशीर्वाद जातक के साथ सदैव बना रहता है। शनिदेव की टेढ़ी नजर से रक्षा करने के लिए शमी के पौधे को घर में लगाकर उसकी पूजा करनी चाहिए। शनि के कोप से यह पवित्र वृक्ष हमारी रक्षा करता है।   होती है मनोकामनायें पूर्ण इस वृक्ष में देवता निवास करते है, इसलिए देवताओं का आशीर्वाद जातक को मिलता है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है । नकारात्मक शक्तियों का नाश करने के लिए, तंत्र-मन्त्र तथा यज्ञों में इस वृक्ष का प्रयोग किया जाता है। दशहरे के दिन कई राज्यों में इसे एक-दूसरे को भेंट के रूप में देते है और एक दूसरे के साथ मधुर संबंधों की कामना करते है। शमी के वृक्ष को आयुर्वेद में बहुत ही गुणकारी माना गया है, इस वृक्ष के विभिन्न अंगों का इस्तेमाल इलाज के तौर पर किया जाता है जिसके फल स्वरुप स्वाथ्य ठीक रहता है। शमी के फूल, पत्ते, टहनिया और रस का प्रयोग भी शनि के दोषों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है, शनि देव मनवांछित फल देते है। अभी अभिमंत्रित गोमेद रत्न प्राप्त करें ज्‍योतिष से संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook The post जानें दशहरे के दिन शमी वृक्ष की पूजा का क्या है ख़ास महत्व appeared first on AstroVidhi. ..read more
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लहसुनिया रत्न का स्वामी केतु ग्रह है। केतु संतान सुख को प्रभावित करता है, संस्कृत में इसे बालसूर्य या विदुर रत्न कहते है और फ़ारसी में इसे लहसुनिया कहते है। जन्‍मकुंडली में केतु दूषित हो, दुर्बल हो या अस्‍त हो तो लहसुनिया पहनना लाभकारी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस ख़ास रत्न को धारण कर लेने से जातक केतु के बुरे प्रभाव से आसानी से बच सकते है और जो लोग जीवन में कठिन दौर से गुजर रहे है, उनके कष्ट भी इस रत्न के प्रभाव से मिट जाते है। लहसुनिया रत्न को धारण करने से जीवन में बहुत मजबूती मिलती है। लहसुनिया रत्न पहनने के फायदे इस रत्न के प्रभाव से कभी भी किसी की बुरी नजर नही लगती तथा बुरे सपने नहीं सताते और न ही किसी से भय लगता है, आप स्वयं को बलशाली महसूस करते है। जीवन में उत्पन्न दुःख, दरिद्रता से छुटकारा मिलता है और व्यक्ति अच्छा जीवन व्यतीत करता है। केतु के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है और केतु अपना रौद्र रूप न दिखाकर व्यक्ति के जीवन में सुख- सम्पन्नता लाता है। इस रत्न को धारण करने से आत्मबल में वृद्धि होती है और कमजोर से कमजोर व्यक्ति भी बलशाली बन जाता है, डर का खात्मा हो जाता है। लहसुनिया राजनीति में पद-प्रतिष्ठा दिलाता है और व्यक्ति धन-संपत्ति प्राप्त करता है। केतु को बलशाली बनाने के लिए ही लहसुनिया धारण किया जाता है, कोई अनचाहा ड़र आपको परेशान कर रहा हो तो वह भी दूर करता है। अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें लहसुनिया रत्‍न ऐसा है कि आपको सांसारिक मोह माया से दूर करता है, इसके प्रभाव से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लहसुनियाके प्रभाव से जातक को व्‍यापार में भी सफलता मिलती है। किन राशियों के लोग लहसुनिया धारण कर सकते है। जिन लोगों की राशि वृषभ, मकर, तुला, कुंभ और मिथुन है, उन लोगों के लिए केतु से सम्बंधित लहसुनिया रत्न पहनना बहुत ही लाभदायक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चन्द्र तथा गुरु केतु के शत्रु ग्रह है, इसलिए सूर्य का रत्न माणिक्य, चंद्रमा का रत्न मोती और गुरु का रत्न पुखराज लहसुनिया के साथ धारण नहीं करना चाहिए, अन्यथा विपरीत परिणाम मिलते है अतः यह तीनो रत्न लहसुनिया के साथ पहनना वर्जित है। मूंगा पहनने से केतु के शुभ प्रभाव प्राप्त होते है क्योंकि मंगल और केतु दोनों के गुणों में समानता होती है। लहसुनिया धारण करने के नियम   लहसुनिया रत्न चांदी की धातु में जड़वाकर दाहिने हाथ की मध्यमा अंगूली में बुधवार के दिन धारण करना उत्तम होता है। बुधवार के दिन अगर अश्विनी, मघा इस तरह के योग हों तो लहसुनिया धारण करने का यह शुभ योग माना जाता है। लहसुनिया धारण करते समय अपने कुल देवता तथा केतु को याद करते हुए ॐ श्रां श्रीं शौं शा: केतवे नमः का 108 बार जाप करना न भूलें, साथ ही धूप दीप जलाकर प्रणाम करें और अपना मुख उत्तर या पूर्व की तरफ रखते हुए लहसुनिया रत्न धारण करें।   अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook The post इन राशियों के लोग करें लहसुनिया रत्न धारण, मिलेगी पद – प्रतिष्ठा और धन संपत्ति appeared first on AstroVidhi. ..read more
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राहू ग्रह का रत्न गोमेद मुख्यतः शहद या गोमूत्र के रंग में पाया जाता है। इस रत्न को राहू की शुभता पाने के लिए ही धारण किया जाता है, कहते है राहू जब किसी पर मेहरबान होता है तो छप्पर फाड़कर देता है और अगर किसी पर अपना बुरा प्रभाव डालता है, तो उसे कंगाल बनाकर छोड़ता है। वैसे तो गोमेद कई रंगों में पाया जाता है फिर भी काला, पीला, सफ़ेद और उल्लू की आँख के रंग के गोमेद को विशेष रूप से पसंद किया जाता है।   जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहू लग्न या त्रिकोण भाव में स्थित हों तो उस भाव के भावेश का रत्न धारण न करके राहू का रत्न गोमेद धारण करना लाभकारी होता है। ज्योतिष शास्त्र में राहू के विषय में यह धारणा है कि राहू जिस भाव में स्थित होता है, उस भाव के स्वामी की सभी शक्तियों को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लेता है। राहू को राजनीति का कारक ग्रह माना गया है। जो व्यक्ति राजनीति में पूर्ण रूप से सक्रिय है और सफल होने की इच्छा रखते है उन्हें राहू का रत्न गोमेद जरुर धारण करना चाहिए।    गोमेद धारण करने के लाभ धन में वृद्धि आप भी ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जीने के सपने देखते है परन्तु धन की कमी के कारण सभी सपने साकार होने से पहले ही मुरझा जाते है तो गोमेद आपको अवश्य धारण करना चाहिए। आपको बता दे की राहू जब किसी जातक की कुंडली में शुभ होता है या उस जातक पर मेहरबान होता है तो जातक को छप्पर फाड़कर धन देता है और अगर किसी पर अपना बुरा प्रभाव डालता है, तो उसे कंगाल बनाकर छोड़ता है। अगर आप भी राहू की कृपा पाना चाहते है, धन का आगमन चाहते है तो राहू का रत्न गोमेद अवश्य धारण करें।    कालसर्प दोष से मुक्ति यदि किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष है, कालसर्प दोष के कारण जीवन में आए दिन नई नई मुसीबतें आ रही है, मानसिक शारीरिक तथा आर्थिक कष्ट बढ़ रहे है तो गोमेद रत्न अवश्य धारण करना चाहिए, इस रत्न के प्रभाव से कालसर्प दोष के कारण उत्पन्न होने वाले कष्टों का निवारण बहुत जल्दी हो जाता है। अभी अभिमंत्रित गोमेद रत्न प्राप्त करें स्वास्थ्य में सुधार यदि कोई जातक त्वचा सम्बन्धी रोगों से परेशान है या पाचन से सम्बंधित कोई रोग बार-बार परेशान कर रहा है, खांसी या क्षय रोग से छुटकारा चाहते है तो आपको गोमेद अवश्य धारण करना चाहिए। यह रत्न इन बीमारियों से कुछ हद तक राहत पहुंचाने में आपकी मदद करता है और धीरे धीरे आपके स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिलता है। व्यापार और शेयर मार्केट में फायदा गोमेद, राहू का रत्‍न जो व्यापार और शेयर मार्केट में फायदा दिलवाने में मदद करता है । यह रत्न किसी भी कंगाल को मालामाल करने की क्षमता रखता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के बौद्धिक क्षमता का विकास होता है और व्यक्ति अपने व्‍यापार के लिए सही निर्णय ले सकते है। शेयर मार्केट और जो लोग व्यापार करते हैं या उस क्षेत्र से जुड़े हैं उन लोगों के लिए यह  रत्न किसी वरदान से कम नहीं है। कौन पहन सकता है गोमेद राहू मकर राशि का स्वामी है अतः मकर राशि वाले लोगों के लिए गोमेद धारण करना लाभदायक होता है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में राहू लग्न या त्रिकोण भाव में स्थित हों तो उस भाव के भावेश का रत्न धारण न करके राहू का रत्न गोमेद धारण करना लाभकारी होता है। मिथुन, तुला, वृष या कुंभ राशि के लोगों को गोमेद अवश्य धारण करना चाहिए। राहू अगर दूसरे, तीसरे, नौवें या एकादश भाव में हो तो गोमेद पहनना चाहिए। राहू यदि केंद्र अर्थात 1, 4, 7 या 10 वे भाव में हो तो गोमेद अवश्य धारण करना चाहिए। बुध या शुक्र के साथ राहू की युति बन रही हो तो गोमेद फायदेमंद होता है।     ज्‍योतिष से संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook अभी अभिमंत्रित गोमेद रत्न प्राप्त करें The post छप्पर फाड़ धन की बरसात करता है, राहू ग्रह का रत्न गोमेद appeared first on AstroVidhi. ..read more
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आठ मुखी रुद्राक्ष में भगवान शिव तथा देवी पार्वती के प्रिय पुत्र विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी वास करते है। आठ दिशाओं और आठ सिद्धियों का नेतृत्‍व करता है आठ मुखी रुद्राक्ष। इस रुद्राक्ष को पहनना गंगा में स्‍नान करने जितना महत्‍व रखता है। आठ मुखी रुद्राक्ष राहु ग्रह से संबंधित है। करियर में आ रही रूकावटे तथा बाधाओं को दूर करने के लिए आठ मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाता है। जिस प्रकार शास्त्र के अनुसार सर्वप्रथम श्री गणेश भगवान की पूजा की जाती है उसी प्रकार आठ मुखी रुद्राक्ष को बिना संकोच के धारण कर लेना चाहिए इसके शुभ प्रभाव बहुत ही जल्दी देखने को मिलते है, धारण कर्ता जीवन में बहुत जल्दी तरक्की करता है, यह रुद्राक्ष बहुत ही प्रभावशाली होता है।   आठ मुखी रुद्राक्ष और ज्योतिष यदि कुंडली में राहु कमजोर हो अथवा अस्त हो तो आठ मुखी रुद्राक्ष को धारण करना लाभदायक होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार आठ मुखी रुद्राक्ष के देवता विघ्नहर्ता गणेश भगवान है। इसी कारण आठ मुखी रुद्राक्ष को धारण करनेवाले व्यक्ति के अंदर शांति, धैर्य, चंचलता, शीतलता और नेतृत्व क्षमता का निर्माण होता है। इसके धारण करने से आत्मविश्वास और मन की शांति प्राप्त होती है, करियर में आ रही बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने के नियम तथा विधि आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करनेवाला व्यक्ति सदाचार का पालन करनेवाला होना चाहिए। आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति की भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था होनी चाहिए। मांस-मदीरा या अन्य नशे की वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। सोमवार अथवा शिवरात्रि के दिन रुद्राक्ष को धारण करना शुभ होता है। रुद्राक्ष धारण करने से पूर्व गंगाजल या कच्चे दूध से रुद्राक्ष को शुद्ध करें। रुद्राक्ष को जागृत करने के लिए“ॐ हूँ नमः” मंत्र का उच्‍चारण 108 बार करें। अभी अभिमंत्रित 8 मुखी रुद्राक्ष प्राप्त करें आठ मुखी रुद्राक्ष के लाभ नेतृत्व क्षमता का विकास आठ मुखी रुद्राक्ष को धारण करनेवाले व्यक्ति के अंदर शांति, धैर्य, चंचलता, शीतलता और नेतृत्व क्षमता का निर्माण होता है। जब किसी क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा का दौर चल रहा हो, तो हर व्यक्ति को अपने भीतर नेतृत्व गुणों का विकास करना जरुरी होता है। अच्छी संचार क्षमता, प्रभावी भाषण, कौशल और निर्णय लेने में आत्मनिर्भर आदि गुणों का विकास करना जरुरी है, और इन सभी गुणों को अपने अंदर समाविष्ट करने के लिए ही आठ मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाता है।  मानसिक शांति के लिए  आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने के बाद धारण करने वाले व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और मन से बुरे विचार दूर हो जाते है। इसमें स्वयं भगवान गणेश वास करते है, इसलिए जीवन में जो भी विघ्न आते है, उन्हें दूर कर व्यक्ति मानसिक शांति हेतु ईश्वर की शरण में जाता है, धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ती है, जीवन सुखमय और आध्यात्म की ओर अग्रसर होता है। आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने से स्वास्थ्य संतुलित रहता है तथा भगवान गणेश का आशीर्वाद धारण कर्ता को मिलता है। करियर में सहायक इसे धारण करने के बाद व्यक्ति का भाग्योदय होता है। करियर में आ रही बाधाएं समाप्त होती है। भगवान गणेश हर क्षेत्र में आपका साथ एवं आशीर्वाद देते है, व्यक्ति आठ मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के बाद बुद्धि, ज्ञान, धन, यश और ऊँचे पद को प्राप्त करता है तथा मनवांछित क्षेत्र में अपना करियर बनाने में सफल होता है। इस रुद्राक्ष के प्रभाव से उच्च पद की प्राप्ति होती है अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति आज के इस भागदौड़ भरी जिन्दगी में क्षणभर सुकून के पल अपने परिवार के साथ बिताने का समय भी व्यक्ति के पास नहीं है, ऐसे में उसके दिमाग में विचित्र बातें घर बना जाती है और उसके दिमाग में अपने जीवन के प्रति उदासीनता के भाव देखने को मिलते है तथा मन में न जाने कब कोई हादसा हो और जीवन ख़त्म हो जाएँ यही डर सताता है इस डर को दूर करने के लिए ही आठ मुखी रुद्राक्ष धारण किया जाता है, इसके प्रभाव से अकाल मृत्यु का भय मन से दूर होता है तथा व्यक्ति अच्छा जीवन यापन करता है। राहू का आशीर्वाद मिलता है हिन्दू ज्योतिष के अनुसार राहू असुर स्वरभानु का कटा हुआ सिर है। अगर आप झूठ बोलते है, लोगों को धोखा देते है शराब पीने और परस्री गमन की आदत है तो आप राहू के प्रकोप के शिकार हो सकते है क्योंकि राहू पाप ग्रह है और व्यक्ति पर केवल इसकी छाया पड़ने से ही जातक की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। जातक की कुंडली में राहू अशुभ स्थिति में हो या राहु की दशा या राहु की अशुभता हो तो जातक के जीवन में न जाने कितने कष्ट आते है, इन कष्टों से छुटकारा पाने के लिए आठ मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए। आठ मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से राहू का आशीर्वाद मिलता है तथा जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा मिलता है।   अभी अभिमंत्रित 8 मुखी रुद्राक्ष प्राप्त करें ज्‍योतिष से संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook The post विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी का हो जिस रुद्राक्ष में वास वो सवारेंगे आपके बिगड़े काम appeared first on AstroVidhi. ..read more

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