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वास्‍तुशास्‍त्र में कई नियमों का उल्‍लेख मिलता है। अगर आप इन नियमों का पालन करते हैं तो आपको फायदा होता है जबकि वास्‍तुदोषों के कारण घर-परिवार में खुशहाली की जगह दुख आता है।

वास्‍तुदोष के कारण कई तरह के कष्‍ट झेलने पड़ते हैं जिसमें से सबसे प्रमुख धन का नुकसान होना है। अगर बार-बार आपको धन की हानि हो रही है तो इसका कारण आपके घर या दुकान का कोई वास्‍तुदोष हो सकता है।

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इसी तरह वास्तु में कई पौधों को लगाने का उल्लेख भी किया गया है। वास्तु के अनुसार इन पौधों को वास्तु के अनुरूप लगाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। मनी प्लांट के बारे में तो आपने सुना ही होगा। वास्तुशास्त्र में हर पौधे के लिए एक शुभ दिशा निर्धारित की गई है। पौधे को सही दिशा में लगाने से उसका शुभ फल प्राप्त होता है तो वहीं गलत दिशा के कारण नुकसान झेलना पड़ता है। मनी प्लांट भी कुछ ऐसी ही विशेषता रखता है। इसे वास्तुशास्त्र में बताई गई दिशा के अनुरूप न रखने से ये पैसों का नुकसान भी करवा सकता है। तो आइए जानते हैं मनी प्लांट से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें -:

Horoscope 2019

किस दिशा में लगाएं

मनी प्लांट को कभी भी ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए। इससे धन हानि, सेहत में गिरावट और संबंधों में खटास आती है। पूर्व-पश्चिम दिशा में मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी। के रिश्ते में खटास आ सकती है। इस दिशा से संबंधों के बीच तनाव उत्पन्न होता है।

मनी प्लांट के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानि आग्ने य कोण उत्तम माना जाता है। इस दिशा में गणेश जी का वास होता है। यहां पर मनी प्लांट लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

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इस बात का रखें ध्‍यान

मनी प्लांट की बेलें कभी भी जमीन को नहीं छूनी चाहिए। इससे घर में रह रहे लोगों को कई तरह के नुकसान से गुज़रना पड़ता है। मनी प्लांट को घर के अंदर लगाना ज्यादा शुभ माना जाता है। इसे गमले या किसी बोतल में लगाया जा सकता है।

कभी मुरझाने ना दें

मनी प्लांट में कभी भी मुरझाए हुए पत्ते‍ न रहने दें। पत्तों का मुरझाना अशुभ माना जाता है। रोज़ मनी प्लांट को पानी दें।

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अब तक आपको लगता होगा कि धन का कारक मनी प्‍लांट धन लाभ देता है लेकिन अगर आप इसे गलत दिशा में रख दें तो ये आपको फायदे की जगह नुकसान दे सकता है। घर में किसी गलत दिशा या स्‍थान पर रखा गया मनी प्‍लांट वहां रहने वाले लोगों के लिए दुख का कारण बन सकता है।

इसके अलावा कई और भी प्‍लांट होते हैं जिन्‍हें घर में लगाने से पहले आपको उनके वास्‍तु के बारे में जान लेना चाहिए। पौधों के अलावा वास्‍तुदोष को खत्‍म करने के कई और भी उपाय हैं जिनमें से एक वास्‍तुदोष निवारण यंत्र भी है। अगर आप अपने घर में बिना किसी टूट-फूट के किसी भी तरह के वास्‍तुदोष को खत्‍म करना चाहते हैं तो अपने घर या दुकान में वास्‍तुदोष निवारण यंत्र की स्‍थापना कर सकते हैं। ये यंत्र इतना शक्‍तिशाली है कि बिना किसी बदलाव के ही अपनी ऊर्जा को पूरे घर में फैलाने लगता है। इसकी सकारात्‍मक ऊर्जा से पूरे घर की नेगेटिव एनर्जी खत्‍म हो जाती है और वहां रहने वाले लोगों के विचारों में भी सकारात्‍मकता आती है।

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अपने जीवन को खुशहाल और समृद्ध बनाने के लिए बहुत जरूरी है कि आप वास्‍तुशास्‍त्र के नियमों का पालन करें। ये नियम आपके जीवन की सभी परेशानियों को दूर कर आपको सुख और सफलता प्रदान कर सकते हैं। वास्‍तुदोष को नज़रअंदाज़ बिलकुल ना करें क्‍योंकि ये आपके जीवन को बहुत बुरी तरह से बर्बाद भी कर सकते हैं। इसलिए इसके दुष्‍प्रभावों से बचने के लिए वास्‍तुदोश निवारण पर ध्‍यान दें। वास्‍तुदोष निवारण के लिए आप AstroVidhi के पं. यूरज शास्‍त्री द्वारा वास्‍तुदोष निवारण पूजा भी करवा सकते हैं।

किसी भी जानकारी के लिए Call करें :  8882540540

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ज्‍योतिषशास्‍त्र की सहायता से हम अपने भविष्‍य में आने वाली समस्‍याओं और अवसरों के बारे में जान सकते हैं। राशि अनुसार आप जान सकते हैं कि आने वाले समय में आपके जीवन में क्‍या होने वाला है।

आइए जानते हैं राशि अनुसार साप्‍ताहिक राशिफल

मेष राशि

आपकी वाणी में मधुरता आएगी। आप अपने कम्‍युनिकेशन स्क्ल्सि से दूसरें को प्रभावित करने मे सफल हो पाएंगें। जो भी बोलें सोच-समझकर बोलें, आपकी बातों से कोई आहत भी हो सकता है। भाई-बहनों से आर्थिक सहायता मिल सकती है। कोई विवाद चल रहा है तो उसमें आपकी जीत होगी।

वृषभ राशि

लोग आपकी पर्सनैलिटी की ओर आकर्षित होंगें। इस समय आपको दूसरों के साथ नरमता, विनम्र और उदारवादी होकर बात करनी है। आपका वैवाहिक जीवन इस समय खुशियों से भरा रहेगा। अगर आपके वैवाहिक जीवन में कोई परेशानी चल रही है तो आप अपनी परेशानी का हल इस रिपोर्ट में मिल सकता है। इस समय आपकी बुद्धिमानी बढ़ेगी। ज्ञान प्राप्‍त करने के लिए आप उत्‍सुक रहेंगें। प्रेम संबंधों के लिए अच्‍छा समय है।

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मिथुन राशि

आपको सेहत संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। मानसिक तनाव भी रहेगा। बुहत ज्‍यादा काम न करें वरना इसका सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ सकता है। खर्चों में बढ़ोत्तरी होगी। विदेश यात्रा पर जाना पड़ सकता है। नया घर खरीदने के बारे में सोच सकते हैं।

कर्क राशि

आपको विदेश से लाभ मिल सकता है। आपको अपने भाई-बहनों का पूरा सहयोग मिलेगा। प्रेम संबंधों के लिए मिलाजुला समय है। अपने करीबियों और दोस्‍तों के साथ ज्‍यादा से ज्‍यादा समय बिताने की कोशिश करें। गाय को चारा और हरी सब्जियों खिलाएं।

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सिंह राशि

आप अपनी बुद्धि से अपने कार्येक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगें। कार्यक्षेत्र में आपके काम को पहचान मिलेगी। आपके सीनियर्स आपकी तारीफ करेंगें। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। इस दौरान आप बहुत ज्‍यादा महत्‍वाकांक्षी रहने वाले हैं। बड़े भाई-बहन से करियर संबंधी सलाह ले सकते हैं।

कन्‍या राशि

आपकी नौकरी में बदलाव आ सकता है। मान-सम्‍मान में बढ़ोत्तरी होगी। इस समय आप नाम और पैसा दोनों कमांएंगें। भाग्‍य का पूरा साथ‍ मिलेगा। स्‍थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।

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तुला राशि

आपको अचानक कोई नुकसान हो सकता है। नई चीज़ें सीखने में आपका रुझान बढ़ेगा। आप रहस्‍यमयी और धार्मिक चीज़ों में ज्‍यादा रुचि लेने वाले हैं। आपके पार्टनर को किसी विवाद या कानूनी मामले से धन का लाभ हो सकता है। नियमित रूप से श्री विष्‍णु सहस्‍त्रनाम स्‍तोत्र का पाठ करें।

वृश्चिक रा‍शि

आपकी वाणी की वजह से विवाद हो सकता है। जीवनसाथी के साथ गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। फिजूलखर्ची से बचें। आपके बिजनेस पार्टनर को मुनाफा होगा। इस दौरान नए रिश्‍ते बन सकते हैं। स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर लापरवाही न बरतें। वृश्चिक राशि के जिन लोगों को सेहत संबंधी परेशानी रहती है वे अपने गले में तुलसी की माला धारण करें।

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धनु राशि

आपकी या आपके पार्टनर की सेहत खराब रह सकती है। इस समय आप स्‍वयं को विवादों में उलझा हुआ पाएंगें। फिजूलखर्ची से परेशान रहेंगें। कार्यक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करेंगें। ऑफिस में प्रमोशन मिल सकता है। नौकरी और आर्थिक मसलों से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें।

मकर राशि

अपनी बुद्धि से लाभ कमाने में सफल हो पाएंगें। उच्‍च शिक्षा के बारे में सोच सकते हैं। नई चीज़ों के बारे में जानने को उत्‍सुक रहेंगें। संतान के लिए अच्‍छा समय है एवं प्रेम संबंधों में भी प्रगाढ़ता आएगी।

कुंभ राशि

आपको अचानक लाभ हो सकता है। मां की सेहत खराब हो सकती है। आपके प्रयासों से सफलता हासिल होगी। ध्‍यान से गाड़ी चलाएं। करियर में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे बचने के लिए आपको चार मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। संतान की सेहत चिंता का विषय रहेगी। जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी।

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मीन राशि

आपके कम्‍युनिकेशन स्किल्‍स बेहतर हो पाएंगें। प्रयास करेंगें तो मुनाफा जरूर होगा। अपने व्‍यापार को बढ़ाने के लिए आपको व्‍यापार वृद्धि यंत्र की पूजा करनी चाहिए। छोटी यात्राएं करनी पड़ सकती हैं। भाई-बहनों से मदद मिलेगी। माता-पिता की सेहत का ध्‍यान रखें। गाय को गुड़ खिलाएं।

अगर आपके जीवन में कोई समस्‍या चल रही है या आपको बहुत प्रयास करने के बाद भी उसका फल नहीं मिल पा रहा है तो आप AstroVidhi की मदद लेकर अपने जीवन को सुखी और सफल बना सकते हैं। AstroVidhi के ज्‍यो‍तिषाचार्य आपकी जन्‍मकुंडली के आधार पर आपका मार्गदर्शन करेंगें और आपको उपाय बताएंगें।

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जून राशिफल 2018 - June Rashifal 2018 (Hindi) Must watch Monthly Horoscope - YouTube

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Vedic astrology is based on constellations. It has divided the 12 signs into 30 degrees each of the zodiac and each sign has 2 and quarter constellations in it. It has divided these signs into 12 equal houses which signify one thing or another.

Significance of Houses in Vedic Astrology

Each house has its own specific signification and now let’s see what is signified by each house simultaneously.

1st House in Vedic Astrology

The first house is the house of the native himself. His body mind and his mental inclinations. It shows the physical body, the looks of the native and overall appearance. The view’s, the impulsiveness of the native and the way to do things and tackle issues are all seen by first house.

This is one of the most important houses as it also covers the diseases which one may come though in his life. Although for diseases other houses are also seen but overall strength of the individual and the immunity levels are judged by this house and the placement of this house lord. The life in early ages, the environment which is given to the individual is all seen from this house. This house also shows the mental inclinations towards spirituality, materialistic possessiveness, and overall approach of the individual to accumulate things.  This house covers the head portion of the native on micro level and also the face.

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2nd House in Vedic Astrology

The second house is also called the kutumb bhava or the dhan bhava. As the name suggests this is the house of relatives, relation with relatives and overall bank balance. This is the house of hidden talents of the native.

This is the house which shows the kind of money an individual will accumulate in his life. This is the house which covers the teeth, face, beauty or the scars of the face as such. This is also the house of primary education and the house of self esteem. This is the house which shows how one values himself where as the first house showed how others will perceive the native. This is the house of possessions of the native whether it is television or washing machine or hair dryer etc. The vehicles are also shown by this house and also by the fourth house. The kind of clothing, furniture, jewelry, the nature of gains and the nature of spending are all shown by this house. The financial securities and investments are all shown by this house. This house shows the attitude of the native about his wealth and the means by which he or she will make money. Whether one will make a lot of money or will he remain a commoner as far as financial gains are concerned are all shown by this house including some other.

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3rd House Significance in Vedic Astrology

This is the house of communication primarily but it is also the house of determination, bravery, valor, aggressiveness, brothers, neighbors, short journeys, and all kinds of transportation.

This is also the house of media, electronic or print media, printing, and publishing, career in these fields. Performing arts, singing, dancing etc are also the subject of this house. This house also shows suicide. This is the house which covers the smaller aspects of things like details in small pieces and information. This is the house of school education, knowledge gained in school time and before college. This is the house of communication, reading, writing, small distance visits, conversation of phone, social media, or any abstract medium. This is house of interviews, success in it, dealings, and negotiations. The 9th house is also seen for the same.

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4th House Significance in Vedic Astrology

This house is also called the maatra bhava or the house of mother. This is the house which is seen for the immovable assets of the natives like house, land, properties, and farms. This is the house of home, both the childhood home and the current home.

The various problems related to vehicles and homes are seen by this house. This is the house of inner security, the feel which one has inside, and the various insecurities which one goes through in his life.  The upbringing of the native is also seen from this house. This is the house of your personal foundations and beliefs and superstitions you make in your later life. This is the house of mother, relationship with mother, and the problems to mother of the native. This house also shows things below the surface of the earth. This is the house of the consciousness of the native.  This is also the house of moksha which is under the houses 8 and 12 also. This is the house also gives the clues of the karmas to be suffered in this life time. Planets and aspects of planets change the overall scenario of this house. Placement of malefic will give bad result and placement of benefics will give positive results related to things of this house.

Significance of 5th House in Vedic Astrology

This house is also called the lakshmi sthaana. This is the house of good deeds done in past lives. This is the house of children, creativity, and pleasures of all kinds. This is the house of performing arts, career in entertainment field like movie and music.

This is the house which makes actors. This is the house of sports, love matters, speculation, and gains and losses from speculation. This is the house of loss of job. This house shows gambling, self expression, this is the house of teaching, hobbies, personal interests, and the things one does to pass the time. This is the house of drama and other such self expressive creativeness. Love affairs of all kinds are subject of the 5th house. It also shows sexual relations, dating, romance and this is the main house to be seen for love marriage. This is the house of luck of the luck attained in this lifetime.

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Importance of 6th House in Astrology

This is the prime house of debts, diseases, and job. This is the house seen for pets, labors, workers, and fellow employees, nature of job, diet, health, and recovery from disease. This is the house for normal daily tasks.

This is the house of how well you do your job, your outlook towards your job and others. This is the house of enemies and foes. This is the house of litigation and also the house of maternal uncle. This house shows whether one will have litigations in life or not and when. How will be the career of father throughout? How will be the maternal uncles? Whether one will face difficulties due to enemies, how strong will the enemies be? Will they be able to harm the native and when are the things seen from this house. This is also the house of debt and whether one will get debts or not and will be able to repay them is also seen from this house. This is the strongest house for money. Salary is seen from this house and also profits from business are also seen from this house. This house shows diseases and recovery from disease also is seen from this house at times. This is the house of personal hygiene and also our response to things and events in day to day life is seen from this house. 

7th House in Astrology

This is the prime house of marriage. From this house marriage is the most important thing or event of life which is seen and judged.

Not only this but this house is also for all one to one relations, business, partnerships, contracts, divorce, separation, quarrels, enemies and diseases of the sexual organs which is also seen from the 8th house and the 6th house. The 7th house is the legal bonding of a man and a woman as husband and wife. What starts from 5th house enters the 7th house as a permanent relationship. The 7th house bindings are about doing things together and are about a larger purpose i.e. progeny, society, and social norms.  This house includes your behavior with your spouse, partner etc and the planets posited in this house will affect the way you treat your partner and others connected with you in some kind of legal bonding.

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8th House in Hindu Astroloy

The 8th house is the house of nature of death, death, occult, black magic, hidden things, indirect gains, rape, suicide, possessions of spouse, family of spouse, gains from insurance, rent, mutual funds, chit funds etc.

This is the house of will and legacies, bankruptcy, clairvoyance etc. This is the house of ravaging sexual acts. Deep sexual desires are shown by this house, group sex, homosexuality, heterosexuality are all shown by this house. Craving for sex always is another signification of this house and rapists have this house very strong. This is also the house for suicide and self harming tendencies.  This is also the house of transformation but yes this transformation happens after loss of something near and dear.

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Significance of 9th House in Astrology

This is the house of religion; this is the house of spirituality and higher; learning. This is the house of long travels and voyages. This is the house of soul searching and the search of self.

This house denotes father, spiritual gurus, long distance travels, and broad things in general, abstract realities, higher purposes, ethics, morals, religious deeds, charities, spiritual or religious gurus, deep thoughts, yoga, meditation, and this is the house of understanding or the level of understanding. The 9th house is the house of understanding larger concepts and having a view about them. It is the house of luck and thus how luck is going to be with the native is also seen from this house. It is the house of father and the native’s relationship with the father is seen from this house. Longevity of father is also seen from this house. Whether one will ever get a real guru or not? This is also the signification of this house. Life partner of another cast or country also is the signification of this house. The third house is the concrete reality of an individual and the ninth house is the abstract one. This is the house of various higher experiences, whether it is with a spiritual guru or with a clairvoyant or the likes.

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Significance of 10th House in Hindu Astrology

The tenth house is the house of profession, career, status, honor, power, prestige, reputation, name, and fame. This is the house of financial success. The success of this house is meant for society at large.

The second house is the house of assets or material things but this is for social reputation and honor. This is the house of politics, social reforms, and responsibilities, sense of doing things. This is the house which relates with your connect with the public and the effect you have on them by your acts of profession. Planets in the 10th house change the way one does thing in his professional life or external sphere.

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11th House Astrology Importance

This is the most important house in the horoscope because this is the house of fulfillment of desires. Without this house coming into play in positive tone, no other house can do anything at all from the scratch itself.

There will be wishes and the karmas but the result will be zero or near zero because the approval of this house will be missing. This is the house which signifies large groups, social gatherings, membership of societies, and if afflicted it also shows group sex between individuals of same or opposite sex.  This is the house which is the house of humanitarianism of a native.

12th House Astrology Importance

This is the house which shows moksha, death, hospitalization, expenses, self realization, death of ego, the subconscious mind, the habits of the past lives, connection with the souls, past memories, sleep, nature of sleep, spiritual development, past karmic bondages, frustrations and results after hard efforts.

This is the house for self improvement also. This also shows lonely place, foreign places, jail, hospitals, secret relationships, hidden enemies, self sacrifices, exile, bribery, seclusion and even murder, suicide and kidnapping etc.

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This was all about the 12 houses in nut shell but this is not the only thing. There are many things more to be considered.

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रातोंरात बदल जायेगी किस्मत अगर धारण करेंगे ये अभिमंत्रित रत्न - YouTube

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ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार देवी-देवताओं को प्रसन्‍न करने के लिए कई तरह के मंत्रों की रचना की गई है जिनमें सर्वोपरि गायत्री मंत्र है। गायत्री मंत्र का जाप भगवान शिव को प्रसन्‍न करने के लिए किया जाता है एवं इस मंत्र के जाप से जीवन के कई सारे कष्‍ट दूर हो जाते हैं।

गायत्री मंत्र को सर्वशक्‍तिशाली माना जाता है और किसी भी मनोकामना की पूर्ति के लिए आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। गायत्री मंत्र की शक्‍तियों से पूरी दुनिया वाकिफ है। इस मंत्र में अनेक शक्तियां विद्यमान हैं जिनका अहसास आपको इसका जाप करने के बाद ही होगा।

किसने की थी गायत्री मंत्र की रचना

भगवान शिव को प्रसन्‍न करने के लिए उनके परम् भक्‍त रावण ने गायत्री मंत्र की रचना की थी। ब्रह्मऋषि विश्वामित्र द्वारा ऋग्वेद में भी इस मंत्र को उल्लेखित करवाया गया था। रावण एक बहुत बड़ा महापंडित था जिसने भगवान शिव को प्रसन्‍न करने के लिए इस मंत्र की रचना की थी। रावण की तपस्‍या और भक्‍ति से प्रसन्‍न होकर भगवान शिव ने रावण को कई वरदान और शक्‍तियां भी प्रदान की थीं।

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पुरुष कर सकते हैं जाप

कहते हैं कि इस मंत्र का स्‍थान उच्‍च है और इसीलिए गायत्री मंत्र का जाप सिर्फ पुरुषों को करना चाहिए। मान्‍यता है कि इस मंत्र का जाप केवल उन लोगों का करना चाहिए जिन्‍होंनें जनेऊ धारण कर रखा हो।

भगवान शिव के अलावा इनका भी है मंत्र

भगवान शिव के अलावा गायत्री मंत्र सूर्य देव को भी समर्पित है। अत: सूर्य देव से ही संबंधित होने के कारण ऐसा माना जाता है कि सूर्योदय और सूर्यास्‍त के समय ही इस मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से सर्वाधिक पुण्‍य की प्राप्‍ति होती है। अगर आप जीवन में सफलता पाना चाहते हैं तो इस मनोकामना की पूर्ति के लिए आपको सूर्य देव को प्रसन्‍न करना चाहिए। सूर्य देव की कृपा पाने के लिए गायत्री मंत्र का जाप करना फलदायी रहता है। करियर में तरक्‍की के लिए गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ फलदायी रहता है।

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गायत्री मंत्र से जुड़ी खास बात

इस मंत्र से जुड़े कुछ ऐसे तथ्‍य भी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। इनमें से एक तथ्‍य है स्त्रियों का गायत्री मंत्र का जाप न करना। शास्‍त्रों के अनुसार स्त्रियों को गायत्री मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए। इस तथ्‍य के पीछे धर्म के साथ-साथ चिकित्‍सकीय कारण भी है।

महिलाएं क्‍यों नहीं करती मंत्र का जाप

मान्‍यता है कि सदियों पहले स्त्रियां भी जनेऊ धारण करती थीं और पुरुषों की भांति धार्मिक कार्यों में हिस्‍सा भी लेतीं थीं लेकिन कुछ समय के पश्‍चात् स्थिति बिलकुल बदल गई।

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ये है मंत्र जाप ना करने की वजह

स्त्रियों के गायत्री मंत्र का जाप न करने के पीछे का सबसे बड़ा कारण महिलाओं को होने वाला मासिक धर्म है। हिंदू धर्म के अनुसार मासिक धर्म के दौरान स्त्रियों को किसी भी तरह के धार्मिक कार्य और पूजा में हिस्‍सा नहीं लेना चाहिए। इसलिए स्त्रियों को गायत्री मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए।

जाप करने पर क्‍या होता है

कहते हैं कि अगर कोई स्‍त्री गायत्री मंत्र का जाप करती है तो वह पुरुष की तरह व्‍यवहार करने लगती है। इतना ही नहीं इसका असर उसके शारीरिक अंगों और त्‍वचा पर भी पड़ता है। चेहरे पर अनचाहे बाल आना और मासिक धर्म में दिक्‍कत आना भी गायत्री मंत्र का जाप करने का ही प्रभाव माना जाता है।

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गर्भवती महिला पर प्रभाव

कहते हैं कि यदि कोई स्‍त्री गर्भवती है या फिर बच्‍चे को जन्‍म दे चुकी है तो उसे गायत्री मंत्र का जाप करने से दूध आने में कठिनाई होती है या दूध का स्राव पहले से काफी कम हो जाता है।

ये सब तो सुनी-सुनाई बातें हैं किंतु इसमें कितनी सच्‍चाई है ये तो कोई नहीं जानता। हिंदू धर्म में अनेक देवी-देवताओं के पूजन और मंत्र जाप को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं जिनमें से शायद ये भी एक है कि महिलाओं को गायत्री मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए।

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इस बात का कोई प्रमाणिक तथ्‍य उपलब्‍ध नहीं है कि स्त्रियों को गायत्री मंत्र का जप नहीं करना चाहिए और इसके ऐसे प्रभावों के बारे में भी किसी शास्‍त्र में उल्‍लेख नहीं मिलता है।

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इन लक्षणों से साफ़ पता लगता है कि आपकी कुंडली में कमज़ोर है शनि ग्रह - YouTube

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आज हमारे जीवन में जिस तरह सुविधाएं बढ़ रही हैं उसी तरह परेशानियां भी बढ़ रही हैं। कोई धन की कमी से परेशान है तो किसी को नौकरी में प्रमोशन नहीं मिल रहा है या कोई नौकरी पाने के लिए लाखों जतन करने में लगा हुआ है।

पारिवारिक कलह, वैवाहिक जीवन का सुख ना मिल पाना और संतान प्राप्‍ति में दिक्‍कत आना, कुछ ऐसी समस्‍याएं हैं जिनसे लोग परेशान हैं। आज हम आपको जीवन की कुछ ऐसी ही सामान्‍य समस्‍याओं और उनके उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं।

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पैसों की कमी से छुटकारा पाने के लिए

बुधवार के दिन किसी भी समय जब कोई किन्नर नज़र आए तो उसे अपने सामर्थ्‍य के अनुसार कुछ रुपए आदि भेंट करें। संभव हो तो उसे भोजन भी कराएं। इसके बाद उस किन्नर से आप एक सिक्का मांग लें। इस सिक्के को अपने गल्ले, कैश बॉक्स या धन स्थान पर रख दें।

कुछ ही दिनों में आप स्‍वयं महसूस करेंगें कि आपकी समस्या का समाधान हो रहा है। पैसों की तंगी को दूर करने के लिए आप अपने घर में महालक्ष्‍मी यंत्र की स्‍थापना भी कर सकते हैं। इस यंत्र में स्‍वयं महालक्ष्‍मी की शक्‍तियां समाहित होती हैं जो आपके धन आगमन के रास्‍ते खोलती है।

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प्रमोशन नहीं मिल रहा है तो

बुधवार की सुबह श्रीगणेश की पीले रंग की मूर्ति की पूजा करें।

  • पूजन में श्रीगणेश को हल्दी की पांच गठान श्री गणाधिपतये नम: मंत्र का उच्चारण करते हुए चढ़ाएं।
  • इसके बाद 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर श्री गजवकत्रम नमो नम: का जाप करके चढ़ाएं।

यह उपाय हर बुधवार को करने से आपकी नौकरी में पदोन्‍नति होने की प्रबल संभावना है। कई बार जन्‍मकुंडली में कमजोर सूर्य की वजह से भी करियर में परेशानी या प्रमोशन मिलने में दिक्‍कत आती है। अगर सूर्य को मजबूत कर लें तो आपको मनचाहा प्रमोशन और नौकरी मिल सकती है। सूर्य को मजबूत करने के लिए माणिक्‍य रत्‍न धारण कर सकते हैं।

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वैवाहिक सुख पाने के लिए

जब आपके पति गहरी नींद में सोए हों, तब एक नारियल, सात गोमती चक्र और थोड़ा-सा गुड़ लेकर इन सभी सामग्री को एक पीले कपड़े में बांध लें। अब इस पोटली को अपने पति के ऊपर से सात बार उतार कर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इसके अलावा प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य दें और अपनी मनोकामना की पूर्ति की प्रार्थना करें। वैवाहिक सुख की प्राप्‍ति के लिए आप गौरी शंकर रुद्राक्ष भी धारण कर सकते हैं। इस रुद्राक्ष पर स्‍वयं मां गौरी और भगवान शिव की कृपा होती है इसलिए इसे धारण करने से वैवाहि‍क जीवन में खुशियां आती हैं।

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कार्य को संपन्‍न करने हेतु

पंचमी या एकादशी तिथि को स्‍नान के पश्‍चात् लघु नारियल का पूजन करें और अपनी मनोकामना कहें। अब 51 बार निम्न मंत्र का जाप करें-

।। ऊं ह्रीं सर्वं वै पूर्णत्वाय फट्।।

पूजन के पश्‍चात् लघु नारियल को नदी में प्रवाहित कर दें। इससे अवश्‍य ही आपको अपने कार्य में सफलता मिलेगी।

मनचाहा परिणाम

कई बार बहुत प्रयास करने के बाद भी मनचाहा फल नहीं मिल पाता है या जैसा आप चाहते हैं वैसा नहीं हो पाता है और आपके सारे प्रयास विफल होते जाते हैं। ऐसी किसी समस्‍या के निवारण के लिए आपको रोजाना सुबह शिवलिंग का जल से अभिषेक करना चाहिए।

इसके पश्‍चात् 11 या 21 बार ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करें और भगवान शिव से अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु प्रार्थना करें। ये उपाय नौकरी पाने या मनचाही नौकरी पाने में भी काम आएगा। अगर नौकरी नहीं टिक पा रही है या बार-बार नौकरी छूट जाती है तो भी आप इस उपाय को कर अपनी मुश्किल को दूर कर सकते हैं।

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पैसों की तंगी का कारण जन्‍मकुंडली का कोई ग्रह दोष भी हो सकता है। अगर आपकी कुंडली में कोई ग्रह दोष चल रहा है तो आपके जीवन में कई तरह की समस्‍याएं और मुश्किलें आती हैं। नौकरी में प्रमोशन नहीं मिल पाता और पैसों की तंगी बनी रहती है। हालांकि, आपको इसका कारण तक समझ नहीं आता है कि आपके साथ ऐसा क्‍यों हो रहा है।

AstroVidhi  की वेबसाइट पर आप ऑनलाइन फ्री जन्‍मकुंडली बना सकते हैं। अगर आपकी कुंडली में कोई दोष है तो आप हमारे ज्‍योतिषाचार्य से संपर्क कर उस दोष के निवारण हेतु बात कर सकते हैं या दोष निवारण पूजा करवा सकते हैं।

किसी भी जानकारी के लिए Call करें :  8882540540

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इन लक्षणों से साफ़ पता लगता है कि आपकी कुंडली में कमज़ोर है शनि ग्रह - YouTube

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हिंदू धर्म और शास्‍त्र में भगवान गणेश को प्रथम पूज्‍य बताया गया है। देश के अलग-अलग हिस्‍सों में गणेश जी को विभिन्‍न रूपों और नामों से पूजा जाता है। देशभर में गणेश जी का पूजन धूमधाम से होता है और गणेश चुतर्थी का पर्व तो देशभर में बहुत हर्ष और उल्‍लास के साथ मनाया जाता है।

गणेश जी को अत्‍यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य या मंगल कार्य को शुरु करने से पहले गणेश जी की आराधना करने का नियम है। शास्‍त्रों के अनुसार भगवान गणेश के 12 स्‍वरूप हैं। इनके हर स्‍वरूप की अलग कथा और महत्‍व है। किस कामना या समस्‍या के लिए भगवान गणेश के किस रूप का पूजन करना चाहिए ये जानना भी बहुत जरूरी है। तो आइए जानते हैं इसी सवाल का जवाब…

महा गणेश

भगवान गणेश की महा गणेश के रूप में पूजा करने से भविष्‍य की हर परेशानी और समस्‍या का नाश होता है। ये स्‍वरूप जीवन में सफलता प्रदान करता है।

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द्विज गणपति

गणेश जी के इस स्‍वरूप की पूजा करने से स्‍वास्‍थ्‍य और सुख की प्राप्‍ति होती है। इन स्‍वरूप में गणेशजी के दो सिर और चार हाथ होते हैं।

हेरंग गणपति

गणपति जी का यह स्‍वरूप मनुष्‍य की संपत्ति और धन की रक्षा करता है। इस स्‍वरूप में गणेश जी के पांच सिर और दस हाथ होते हैं।

वीर गणपति

गणेश जी के इस स्‍वरूप की पूजा करने से व्‍यक्‍ति पराक्रमी और साहसी बनता है। महिलाओं को रोगों से बचाने के लिए भी इस स्‍वरूप का पूजन किया जाता है। अपने इस रूप में गणेश जी ने अपनी सोलह भुजाओं में भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार के शस्‍त्र लिए हुए हैं।

करपग विनायगर

गणपति जी का ये स्‍वरूप हर मनोकामना को पूर्ण कर आपको आर्थिक रूप से समृद्ध बनाता है।

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गणेशनी

जीवन में आने वाली हर परेशानी, हर मुश्किल और बीमारी को दूर करता है गणेश जी का गणेशनी स्‍वरूप। ये आपके जीवन में केवल अच्‍छे संबंधों के आने का ही मार्ग खोलते हैं।

नरमुग गणपति

ये स्‍वरूप भगवान गणेश का प्राचीन रूप है। इस स्‍वरूप में गणेशजी का मुख हाथी का नहीं बल्कि मनुष्‍य का ही है।

सिद्धि-बुद्धि गणपति

इस स्‍वरूप में भगवान गणेश अपनी दोनों पत्नियों ऋद्धि और सिद्धि के साथ विराजमान हैं। सिद्धि हमें सहजज्ञान और बुद्धि हमें व्‍यवहारिक ज्ञान प्रदान करती हैं।

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 नृत्‍य गणपति

वृक्ष के नीचे नृत्‍य करते गणपति जी की आराधना करने से मनोकामना पूरी होती है और जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही अपने पूर्वजों का आशीर्वाद भी मिलता है

विघ्‍नहर्ता

श्रीगणेश का यह स्‍वरूप विघ्‍नों का नाश करता है। इनकी पूजा करने से आपके कार्य में आने वाली सभी रुकावटें दूर होती हैं।

अलिंग नर्तन गणपति

इस स्‍वरूप में गणपति जी कलिंग नामक सांप के फन पर नृत्‍य कर रहे हैं। यह रूप बुराई पर अच्‍छाई की जीत को दर्शाता है।

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समस्‍या

इस स्‍वरूप में गणेशजी उन लोगों की सहायता करने हैं जो अच्‍छे कर्मों के बावजूद समस्‍याओं से जूझ रहे हैं।

गणेश जी के इन स्‍वरूपों की पूजा आप अपनी समस्‍या के अनुसार कर सकते हैं। भगवान गणेश हर रूप में अपने भक्‍तों की सहायता करते हैं। भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए आप अपने घर या दुकान में मूंगा गणेश की स्‍थापना भी कर सकते हैं।

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अपने द्वार पर आए प्रत्‍येक भक्‍त की मनोकामना को गणेश जी पूरा करते हैं। मान्‍यता है कि इनके पाए आए भक्‍त कभी खाली हाथ नहीं लौटते हैं। तो अगर आपकी भी कोई मनोकामना अधूरी रह गई है तो आप भी बिना कोई देर किए गणेश जी की शरण में आ जाएं।

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एक्टर बनना चाहते हैं तो जरूरी है कुण्डली में ये योग | - YouTube

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Yellow sapphire stone is the most wanted stone amongst all. Blue sapphire being next. It is the stone of Jupiter, the biggest planet amongst all and it is supposed to be the most benefic planet amongst all.

Yellow Sapphire Guide

Yellow sapphire is a shining yellow stone which is very attractive and mesmerizing. It has very fine cuts and unique design. It is not over statement that this stone is sought by one and all. Whether one is poor or rich, everyone wants to get the blessings of Jupiter.

It is also used as a fashion statement by women who use it as their engagement ring stone, ear ring stone etc.

About Jupiter planet

The planet Jupiter is the largest amongst all the nine planets and is the biggest benefic of all.  Jupiter is the deva Guru or the teacher and preacher of all deities. He is serious and godly. He has a very positive impact on everyone.

It likes to make things expand and extend. It rules over the signs Sagittarius and Pisces. It has he ownership of constellations Punarvasu, vishakha, Poorvbhadrapada. It is the prime significator of wealth, health, knowledge, Law, marriage and progeny.

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Why yellow Sapphire for Jupiter?

The color of Jupiter is Yellow; this is assumed and mentioned in the texts of astrology. Yellow sapphire is the stone which has the ability to capture the aura of Jupiter and transmit it on to the wearer of the stone. Thus the wearer gets the full benefic rays of Jupiter and gets prosperity in life.

Benefits of wearing Yellow Sapphire

The major benefits of wearing this stone are as below; the good thing with this stone is that it has no side effects of any kind:

  • The wearer gets money from multiple sources.
  • The stone enhances the luck factor in life and brings the wearer to success.
  • This is a boon for females who are unmarried and are not getting married at the right age. Jupiter is the prime karaka for marriage for females.
  • The wearer of stone gets inclined towards religion and spirituality.
  • This stone eradicates the negative thoughts from the mind of wearer and make him positive.
  • Those into government jobs, Law, Religions fields, Accounts etc should wear this stone. 
  • Wearing this stone brings marital bliss in the lives of the couple. If they are going through a bad phase then they see a better life.

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Health benefits of Yellow Sapphire

Yellow sapphire helps in the problems of:

  • Joint pains,
  • Bones,
  • Piles,
  • Cough
  • Lungs
  • Jaundice
  • Kidney disorders
  • Cholera
  • Bad breath
  • Cardiac problems
Is Pukhraj stone real?

Some clues for you to differentiate between the fake and the real one:

  • The fake stone will not have the density and force of the original one and will not feel like it either.
  • There is some or the other impurity in the real stone and it also appears a bit dark yellowish.
  • The stone if it is reflecting two or more colors is considered to be a fake one.
  • The original stone may lit up fire if rubbed for a long time where as the fake one will simply break.

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Origin of Yellow Sapphires

Yellow Sapphire is found in many countries and Russia being one of the main supplier as it is found in many mines here, Brazil being the another one and has the reputation of giving Yellow Sapphire of the best kind. The stones here are of light yellow color and have very nice looks. Rhodesia also gives this stone but it is not considered to e of very good quality.

The Yellow Sapphire of Ceylon in Sri Lanka is known worldwide. The stones are here are of very fine quality and this is the country which gives cost effective and good quality stones.

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When to wear Yellow Sapphire?

One should wear the stone in Gold on Thursday morning. It will be better to wear in the shukla paksha.

Which finger to be used for Yellow Sapphire ring?

The ring should be worn in the first finger, the finger of Jupiter.

Which metal should be used for Pukhraj ring?

One should wear this ring in gold. The ring should be worn after its touches the finger so that it can emit maximum effect on the wearer.

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Mantra to be chant for Pukhraj Ring

Recite the following mantra for 108 times:

“OM GURUVE NAMAHA”

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इन लक्षणों से साफ़ पता लगता है कि आपकी कुंडली में कमज़ोर है शनि ग्रह - YouTube

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वैसे तो संसार में श्रीकृष्‍ण के कई भक्‍त हैं लेकिन उनमें मीराबाई सबसे अलग और ऊपर आती हैं। किवंदती है कि कृष्‍ण प्रेम में मीराबाई ने अपना सब कुछ छोड़ दिया था और स्‍वयं को कृष्‍ण भक्‍ति में लीन कर दिया था।

श्रीकृष्‍ण की परम भक्‍त थी मीरा जिन्‍होंनें अपना पूरा जीवन कृष्‍ण भक्‍ति में विलीन कर दिया था। श्रीकृष्‍ण की परम भक्‍त मीराबाई की मृत्‍यु आज भी एक रहस्‍य है। पुराणों में भी मीराबाई की मृत्‍यु का कोई प्रमाण नहीं मिलता।

विद्वानों के भी इस विषय में अलग-अलग मत हैं। लूनवा के भूरदान ने मीरा की मौत 1546 में बताई। वहीं डॉ. शेखावत के अनुसार मीरा की मृत्यु 1548 में हुई। आइए जानते हैं मीराबाई के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें -:

Horoscope 2019

  • राजस्‍थान के मेड़ता में 1498 ई. में जन्‍मी मीराबाई के पिता मेड़ता के राजा थे। किवदंती है कि मीराबाई को छोटी उम्र में उनकी मां ने यूं ही कह दिया था कि श्रीकृष्‍ण तेरे दूल्‍हा हैं। बस फिर क्‍या था मीरा ने अपना पूरा जीवन इसी बात को सच मानकर गुज़ार दिया।
  • उम्र के बढ़ने के साथ-साथ मीरा का कृष्‍ण के प्रति प्रेम भी बढ़ता गया। मीराबाई अपने पति के रूप में श्रीकृष्‍ण को लेकर अनेक कल्‍पनाएं बुनती थीं।

  • सन् 1516 में मीराबाई का विवाह राणा सांगा के पुत्र और मेवाड़ के राजकुमार भोजराज के साथ संपन्‍न हुआ था। एक युद्ध में सन् 1521 में मीराबाई के पति का देहांत हो गया था।

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  • पति की मृत्‍युशैय्या पर मीरा ने सती होना स्‍वीकार नहीं किया और धीरे-धीरे संसार से विरक्‍त होती चलीं गईं। मीराबाई साधु-संतुओं के साथ भजन-कीर्तन में अपना समय व्‍यतीत करती थीं।
  • मीरा के ससुराल पक्ष ने उनकी अपार कृष्‍ण भक्‍ति को राजघराने के प्रतिकूल मानकर उन पर अत्‍याचार करने लगे। इसके बाद मीरा ने अपने सुसराल को छोड़ दिया और कृष्‍ण भक्‍ति करते हुए द्वारका पहुंच गईं।
  • मान्‍यता है कि इसी स्‍थान पर कृष्‍ण भक्‍ति में लीन होते हुए वह कान्‍हा की मूर्ति में समा गईं।

मान्‍यता है कि अपनी प्रिय और परम भक्‍त को लेने के लिए स्‍वयं भगवान कृष्‍ण आए थे। मीराबाई की मृत्‍यु नहीं हुई थी बल्कि वो भगवान कृष्‍ण की मूर्ति में समा गई थीं। अब किसी भक्‍त के लिए इससे अच्‍छी मृत्‍यु और क्‍या हो सकती है।

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मीरा के अलावा श्रीकृष्‍ण के जीवन की बात करें तो रुक्मिणी के साथ-साथ उनकी 16 हज़ार रानियां थीं। श्रीकृष्‍ण ने रुक्‍मिणी से प्रेम विवाह किया था किंतु उनका प्रथम प्रेम को राधा ही थीं। शायद इसी वजह से आज भी भगवान कृष्‍ण के साथ उनकी पत्‍नी रुक्‍मिणी की नहीं बल्कि राधा जी की पूजा होती है।

श्रीकृष्‍ण का राधा से विवाह तो नहीं हुआ था किंतु फिर भी दोनों के प्रेम को अमर और पवित्र माना जाता है। वहीं मीराबाई की बात करें तो उसने अपना सारा जीवन की कृष्‍ण भक्‍ति को समर्पित कर दिया था। मीराबाई ने विवाह तो किया था लेकिन कभी उसका निर्वाह नहीं किया। विवाह के पश्‍चात् भी मीरा कृष्‍ण की भक्‍ति में लीन रहती थी। अपने अंतिम समय में भी उसे कृष्‍ण प्रेम ने ही मोक्ष दिलवाया था।

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इन लक्षणों से साफ़ पता लगता है कि आपकी कुंडली में कमज़ोर है शनि ग्रह - YouTube

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ज्‍योतिषशास्‍त्र में सौरमंडल के नौ ग्रहों का उल्‍ले‍ख किया गया है जिनमें सूर्य और उनके पुत्र शनि देव का प्रमुख स्‍थान माना गया है। कहा जाता है कि शनि देव के अपने पिता सूर्य देव से अच्‍छे संबंध नहीं हैं। इन दोनों के बीच शत्रुता रहती है और इस वजह से जिस व्‍यक्‍ति की कुंडली में ये दोनों ग्रह एकसाथ आ जाते हैं उस व्‍यक्‍ति के अपने पिता के साथ संबंध खराब होने लगते हैं।

सूर्य-शनि का ये योग
  • अगर किसी व्‍यक्‍ति को अपने पुत्र से वियोग सहना पड़ता है तो उसकी कुंडली में सूर्य-शनि का ये योग बन सकता है। इस योग के कारण जातक को अपने पिता का साथ नहीं मिल पाता है।
  • अगर कुंडली में सूर्य और शनि आमने-सामने यानि समसप्‍तक हों तो पिता और पुत्र के मध्‍य वैचारिक मतभेद रहते हैं।
  • वहीं लग्‍न भाव में सूर्य हो और शनि सप्‍तम भाव में बैठा हो तो परिवार में रहने वाले सदस्‍यों के बीच वैचारिक मतभेद रहते हैं। इस वजह से घर में क्‍लेश का माहौल रहता है। सेहत खराब रहती है और सदस्‍यों का अपने विचारों पर संयम नहीं रह पाता है। इस वजह से आपके काम बिगड़ सकता है। धन से संबंधित परेशानियां भी आ सकती हैं।

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  • यदि सूर्य तृतीय और शनि नवम भाव में बैठा है तो इस योग से भाईयों, दोस्‍तों, पार्टनर्स में तालमेल नहीं बन पाता है। ये भाग्‍य का साथ ना मिल पाने का भी कारण बनता है। धर्म-कर्म में आस्‍था नहीं रहती है।
  • जन्‍मकुंडली के चौथे भाव में सूर्य और दशम भाव में शनि हो तो जातक को अपने पिता या पुत्र से दूर रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पिता-पुत्र एकसाथ नहीं रह सकते हैं। किसी भी कारणवश पुत्र की दूरी पिता से बनी रहती है।
  • कुंडली के पाचंवे भाव और एकादश से बनने वाले समसप्‍तक योग से जातक को शिक्षा में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। संतान से वैचारिक मतभेद रहते हैं।
  • षष्‍टम और एकादश भाव में सूर्य और शनि का समसप्‍तक योग व्‍यक्‍ति को आंखों से जुड़े रोग देता है। हालांकि, कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है।

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चलिए अब जान लेते हैं शनि-सूर्य के अशुभ योग के दुष्‍प्रभाव को कम करने के उपायों के बारे में..

  • रोज़ सुबह उठकर स्‍नान के पश्‍चात् सूर्य को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं।
  • शनिवार के दिन तेल का दान करें और शनि देव की पूजा करें।
  • शनिवार के दिन पीपल की सात परिक्रमा करें।
  • हनुमान जी की पूजा से सूर्य और शनि देव दोनों की प्रसन्‍न होते हैं। ये उपाय शनिदोष को भी दूर करता है।
  • सूर्य के मंत्र – ऊं सूर्याय नम: एवं शनि के मंत्र – ऊं शं शनैश्‍चराय नम: का जाप करें।

ज्‍योतिषशास्‍त्र में हर ग्रह के दोष को दूर करने एवं उसकी शांति के लिए उपाय किए जाते हैं। अगर आपकी कुंडली में सूर्य, शनि या अन्‍य कोई भी ग्रह दोष है तो आप AstroVidhi से ग्रह दोष पूजा करवा सकते हैं। इस पूजा की सबसे खास बात ये है कि आप अपने घर बैठे ही ऑनलाइन इस पूजा में शामिल हो सकते हैं।

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अब तक AstroVidhi के ज्‍योतिषाचार्य एवं पंडित कई ग्रह दोष पूजन जैसे शनि शांति पूजा, मांगलिक दोष निवारण पूजा, राहू शां‍ति पूजा आदि करवा चुके हैं। आप भी अपने या अपने किसी संबंधी के लिए ये पूजा करवा सकते हैं।

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मनोकामना पूर्ण करने और सुखी रहने के लिए ऐसे करें कष्ट निवारण पूजा - YouTube

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हर किसी को अपना भविष्‍य जानने की उत्‍सुकता रहती है। कोई भी महत्‍वपूर्ण निर्णय लेने से पहले ये जान लेना बेहतर होता है कि उसका परिणाम कैसा होगा। अगर आप इस सप्‍ताह कुछ नया करने की सोच रहे हैं तो जान लें कि आपके लिए ये सप्‍ताह कैसा रहेगा।

मेष राशि

करियर को लेकर आपके व्‍यवहार में आक्रामकता रहेगी। प्रयासों में असफलता मिलेगी। इस समय आपको अपने मन को शांत रखना चाहिए तभी आपको कोई फायदा हो सकता है। अपने मन और मस्तिष्‍क को शांत रखना चाहिए।

वृषभ राशि

व्‍यर्थ की यात्रा करनी पड़ सकती है। प्रेम संबंध या वैवाहिक जीवन में मनमुटाव रह सकता है। छोटे भाई के साथ किसी बात पर विवाद हो सकता है। कम्‍युनिकेशन के मामले में आप अपनी हद पार कर सकते हैं।

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मिथुन राशि

दोस्‍तों का सहयोग प्राप्‍त होगा और नौकरी में भी तरक्‍की मिलेगी। घर पर कोई रिपेयर का काम हो सकता है। अपनी किसी अचल संपत्ति के बारे में भी सोच सकते हैं। अपनी वाणी और व्‍यवहार पर नियंत्रण रखें।

कर्क राशि

अचानक से कोई परेशानी आ सकती है। किसी वजह से आपको तनाव हो सकता है। छोटे भाई से सलाह मिल सकती है। खर्चों में बढ़ोत्तरी होगी। अपनी इच्‍छाओं पर नियंत्रण रखें।

सिंह राशि

इस सप्‍ताह आपको भाग्‍य के भरोसे नहीं बैठना है। ज्‍यादा समझदार बनने की कोशिश ना करें वरना आपको ही नुकसान हो सकता है। कुछ समय के लिए घर से दूर जाना पड़ सकता है। धन लाभ होगा लेकिन बहुत जल्‍दी खर्च भी हो जाएगा।

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कन्‍या राशि

भाई से कोई फायदा हो सकता है। घर पर रखे किसी पुराने लेख से आपको फायदा मिल सकता है। मीडिया, मनोरंजन, ब्‍लॉगिंग और इंटरनेट से जुड़े लोगों के लिए अच्‍छा समय है। नए दोस्‍त बनाने का मौका मिलेगा।

तुला राशि

किसी से पैसे उधार लेने पड़ सकते हैं। सेहत संबंधी कोई दिक्‍कत आ सकती है। कानूनी मामलों में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। रियल एस्‍टेट से जुड़ लोगों को फायदा हो सकता है। यात्रा पर पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। जिस बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा आपको वो मिल सकता है।

वृश्चिक राशि

आपके लिए बहुत अच्‍छा समय है। किसी लंबी यात्रा पर जाना पड़ सकता है। दोस्‍तों के साथ अच्‍छा समय बिताने का मौका मिल सकता है। इस समय आपको कोई मुश्किल फैसला लेना पड़ सकता है। दूसरों के मुकाबले आपको ज्‍यादा तेजी से सफलता हासिल होगी। भाग्‍य का साथ नहीं मिलेगा।

धनु राशि

इस सप्‍ताह आपको कर्ज से मुक्‍ति मिल सकती है। किसी ऐसे कार्य को आरोप आपके ऊपर लग सकता है जो आपने किया ही ना हो। अचानक प्रमोशन मिल सकता है। जीवनसाथी के साथ मनमुटाव हो सकता है।

मकर राशि

आपके मन में अलग-अलग भावनाएं हिलोरे खाने लगेंगीं। जीवनसाथी के साथ झगड़ा हो सकता है। आप अपने पार्टनर पर शक भी कर सकते हैं। बुरे लोगों का साथ मिलेगा। अनैतिक संबंध बना सकते हैं। पार्टनरशिप में काम करते हैं तो आपको किसी बिजनेस डील से फायदा हो सकता है।

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कुंभ राशि

प्रेम संबंधों के लिए मुश्किल समय है। वैवाहिक जीवन भी तनावपूर्ण रहेगा। कार्य में प्रगति नहीं मिलेगी। शेयर मार्केट में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। दिमाग में कई तरह के ख्‍याल आते रहेंगें जो आपको परेशान कर सकते हैं।

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मीन राशि

नए प्रेम संबंध बना सकते हैं। किसी को प्रपोज़ करने के बारे में सोच सकते हैं। जवाब में हां में मिलेगा या ना में, ये आपकी कुंडली पर‍ निर्भर करता है। किराए के घर में रहते हैं तो इस समय आपको अपना घर शिफ्ट करना पड़ सकता है।

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जून राशिफल 2018 - June Rashifal 2018 (Hindi) Must watch Monthly Horoscope - YouTube

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