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गोवर्धन पूजा तिथि- 28 ..read more
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दीपावली 2019 – 27 ..read more
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दशहरा मुहूर्त अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दोपहर के बाद मनाया जाता है। इस काल की अवधि सूर्योदय के बाद दसवें मुहूर्त से लेकर बारहवें मुहूर्त तक की होती है। यदि दशमी दो दिन हो और केवल दूसरे ही दिन अपराह्नकाल को व्याप्त करे तो विजयादशमी दूसरे दिन मनाई जायेगी। यदि दशमी दो दिन के अपराह्नकाल में हो तो दशहरा पहले दिन मनाया जाएगा। दशहरा तिथि एवं मुहूर्त 8 अक्टूबर मंगलवार विजय मुहूर्त- 14:05:40 से 14:52:29 पूजा का समय- 13:18:52 से 15:39:18 तक भारतीय संस्कृति में हर त्यौहार का अपना एक अलग और ख़ास महत्व है और हर त्यौहार अपने साथ बेहतर जीवन जीने का एक अलग सन्देश देता है, उनमे से एक है दशहरा, जो दीवाली से ठीक बीस दिन पहले अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयादशमी के रूप में बहुत ही जोर-शोर से मनाया जाता है। यह पर्व असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है। यह पर्व भगवान श्री राम की कहानी तो कहता ही है, जिन्होंने लंका के अहंकारी राजा रावण को मार गिराया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करवाया। वहीं इस दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिए भी इसे विजयादशमी के रूप में बहुत ही जोर-शोर से मनाया जाता है और माँ दुर्गा की पूजा भी की जाती है। माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी माँ दुर्गा की पूजा कर शक्ति का आव्हान किया था। भगवान श्री राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिए रखे गये कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया। चूँकि श्री राम को राजीवनयन यानी कमल से नेत्रों वाला कहा जाता है इसलिए उन्होंने अपना एक नेत्र माँ को अर्पण करने का निर्णय लिया ज्यों ही वे अपना नेत्र निकलने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुई और विजयी होने का आशीर्वाद दिया। माना जाता है की इसके बाद दशमी के दिन प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया और भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस पर्व को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है। कुल्लू का दशहरा देश भर में काफी प्रसिद्ध है तो पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, त्रिपुरा सहित कई राज्यों में दुर्गा पूजा को भी इस दिन बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इस दिन बंगाल की सड़कों में हर तरफ भीड़ ही भीड़ दिखाई पड़ती है। दशमी के दिन माँ दुर्गा का विसर्जन किया जाता है और इस तरह से देवी दुर्गा अपने परिवार के पास वापस लौट जाती है। इस दिन पूजा करने वाले सभी लोग एक दूसरे के घर जाते है और एकदूसरे को शुभकामना देते है।  अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें विजयादशमी को अपराजिता पूजा का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, इस दिन अन्य पूजाओं का भी प्रावधान है जो की निम्न है:- दशहरे का दिन साल के सबसे पवित्र दिनों में से एक है। यह साढ़े तीन मुहूर्त में से एक है। (साल का सबसे शुभ मुहूर्त – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अश्विन शुक्ल दशमी, वैशाख शुक्ल तृतीया, एवं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (आधा मुहूर्त))। यह अवधि किसी भी नवीन कार्य की शुरुआत करने के लिए उत्तम होती है। जब सूर्यास्त होता है और आसमान में कुछ तारे दिखने लगते है तो यह अवधि विजय मुहूर्त कहलाती है इस मुहूर्त में पूजा करना उत्तम माना गया है। इस दिन शस्रों/आयुध की पूजा की जाती है, प्राचीन समय में ही यह परम्परा चली आ रही है। इस दिन सरस्वती की पूजा भी की जाते है, वैश्य अपने बहीखाते की आराधना इस दिन करते है। इस दिन बंगाल में दुर्गा पूजा बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाकर भगवान राम की जीत का जश्न मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है की इस दिन माँ भगवती जगदम्बा का अपराजिता स्रोत्र करना बड़ा ही पवित्र होता है। दशहरे के दिन ये काम करने से मिलता है पुण्य:- कहते है दशहरे के दिन यदि किसी भी भक्त को नीलकंठ नाम का पक्षी दिख जाए तो काफी शुभ होता है। कहते है नीलकंठ भगवान शिव का प्रतीक है, जिनके दर्शन मात्र से ही सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है। दशहरे के दिन गंगा स्नान करने को भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। कहा जाता ही की दशहरे के दिन गंगा स्नान करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है, इसलिए दशहरे के दिन पुण्य प्राप्त करने के लिए लोग गंगा या अपने आसपास के किसी पवित्र नदी में स्नान करने जाते है। अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook The post दशहरा 2019- विजयादशमी तिथि एवं मुहूर्त appeared first on AstroVidhi. ..read more
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धनतेरस तिथि तथा पूजा मुहूर्त 25 अक्टूबर 2019 ..read more
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अहोई अष्टमी का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व करवा चौथ के चार दिन बाद तथा दीवाली के आठ दिन पहले मनाया जाता है। अहोई माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तथा अपनी संतान के कल्याण के लिए इस व्रत को किया जाता है। प्राचीन काल में यह व्रत केवल पुत्र संतान के लिए ही किया जाता है परन्तु आजकल यह कन्या संतान के लिए भी किया जाता है। अहोई माता मेरे पुत्रों को दीर्घायु, स्वस्थ्य तथा सुखी रखें, अनहोनी से बचाने वाली माता देवी पार्वती है इसलिए इस व्रत में माता पार्वती की पूजा की जाती है।    अहोई अष्टमी 2019 21 अक्टूबर 2019- सोमवार पूजा का समय – 19:38 से 20:43 मिनिट तक  तारों के दिखने का समय- सायं 20:10 बजे चंद्रोदय रात्रि- 02:41 मिनिट (22 अक्टूबर 2019) अष्टमी तिथि प्रारम्भ -21 अक्टूबर 2019 को दोपहर 2 बजकर 14 मिनिट से अष्टमी तिथि समाप्त- 22 अक्टूबर 2019 को दोपहर 12: 55 तक  अहोई अष्टमी का महत्व अहोई अष्टमी  व्रत की उत्तर भारत में बहुत मान्यता है। माताएं अपने पुत्रों की ख़ुशी एवं कल्याणकारी जीवन की कामना करते हुए इस व्रत को करती है। माताएं बहुत ही उत्साह के साथ इस व्रत को करती है। अपनी संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन के लिए माता अहोई से प्रार्थना करती है। तारों तथा चंद्रमा के दर्शन तथा विधिवत पूजा करने के बाद ही व्रत खोलती है। अहोई अष्टमी  का व्रत उन दंपत्ति के लिए भी फलदायी होता है, जिनकी कोई संतान नहीं होती या जिसकी संतान गर्भ में ही खत्म हो जाती है या बार-बार गर्भपात की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी महिलायें अगर पुत्र प्राप्ति की कामना करती है तो उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ अहोई माता का व्रत करना चाहिए। अहोई माता के आशीर्वाद से उनकी सुनी गोद जरुर भर जाती है। इसी कारण से इस दिन को कृष्णा अष्टमी के नाम से भी लोग जानते है। कई सैलून से मधुरा के राधा कुंड में अहोई अष्टमी के दिन बड़ी संख्या में पुत्र प्राप्ति की आस लिए हुए दंपत्ति आते है तथा इस पावन कुंड में स्नान करते है।     अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें अहोई अष्टमी व्रत कथा इस पर्व को मनाने के पीछे एक कथा प्रचलित है कहते है एक साहूकार के सात पुत्र और एक पुत्री थी। साहूकार के बेटों की शादी हो चुकी थी और बेटी भी विवाहित थी। साहूकार की बेटी दिवाली पर अपने ससुराल से मायके आई थी। दिवाली पर घर की साफ-सफाई कर घर को लीपना था, इसलिए सारी बहुएं जंगल से मिट्टी लेने गई, यह देखकर ससुराल से मायके आई साहूकार की बेटी भी उनके साथ चल पडी।   साहूकार की बेटी जब मिट्टी खोद रही थी, उस जगह पर स्याहु अपने बच्चों के साथ रहती थी, मिट्टी खोदते समय गलती से साहूकार की बेटी की खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया इस पर क्रोधित होकर स्याह ने कहा की मै तेरी कोख बांधूंगी।   स्याहु के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक एक कर विनती करती है कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा ले, इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते है, वह सात दिन बाद ही मर जाते है, सात पुत्रों की इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा। पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी। सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और छोटी बहू से पूछती है की तू किस लिए मेरी इतनी सेवा कर रही है और वह उससे क्या चाहती है? जो कोई भी तेरी इच्छा हो, वह मुझसे मांग लें। साहूकार की बहु ने कहा कि स्याह माता ने मेरी कोख बाँध दी है, जिससे मेरे बच्चे नहीं बचते है, यदि आप मेरी कोख खुलवा दे तो मै आपका उपकार मानूँगी। गाय माता ने उसकी बात मान ली और उसे साथ लेकर सात समुद्र पार स्याहु माता के पास ले चली।    अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते है। अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती है और वह देखती है की एक सांप पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है। इतने में गरूड पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है की छोटी बहू ने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है। इस पर छोटी बहू कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है और गरूड पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है। छोटी बहू स्याहु की भी सेवा करती है और स्याह छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है, स्याहु छोटी बहू को सात पुत्र और सात पुत्र वधुओं का आशीर्वाद देती है और कहती है की घर जाने पर तू अहोई माता का उद्यापन करना। सात-सात अहोई बनाकर सात कड़ाही देना, उसने घर लौट कर देखा तो उसके सात बेटे और बहुएं मिली वह खुशी के मारे रोने लगी। उसने सात अहोई बनाकर सात कड़ाही देकर उद्यापन किया। उसके बाद से ही अपने संतान के सुख और कल्याण के लिए अहोई माता का व्रत करने की परम्परा है। पूजा विधि व्रत के दिन प्रात: जल्दी उठकर स्नान आदि के पश्चात पूजा का संकल्प लिया जाता है की हे अहोई माता में अपने पुत्र की लम्बी आयु एवं सुखी जीवन के लिए अहोई व्रत कर रही हूँ। अहोई माता मेरे पुत्रों को दीर्घायु, स्वस्थ्य एवं सुखी रखे। अहोई माता की पूजा के लिए गेरू से दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाया जाता है और साथ ही स्याह और उसके सात पुत्रों का चित्र भी निर्मित किया जाता है। माता के सामने चावल की कटोरी, मुली, सिंघाड़े रखते हुए सुबह दिया रखकर कहानी कही जाती है। कहानी सुनते समय जो चावल हाथ में लिए जाते है, उन्हें साड़ी/सूट के दुपट्टे में बाँध लेते है और सुबह पूजा करते समय लोटे में पानी और उसके ऊपर सिंघाड़े रखते है। सायंकाल को अहोई के चित्रों की पूजा की जाती है और पके हुए खाने में चौदह पूरी और आठ पूयों का भोग अहोई माता को लगाया जाता है, उस दिन बयाना निकाला जाता है। बायने में चौदह पूरी या मठरी या काजू होते है। लोटे का पानी शाम को चावल के साथ तारों को अर्ध्य किया जाता है। अहोई पूजा में एक अन्य विधान यह भी है कि चांदी की अहोई बनाई जाती है, जिसे स्याहु कहते है। इस स्याहु की पूजा रोली, अक्षत, दूध, व भात से की जाती है। पूजा चाहे आप जिस विधि से करें लेकिन दोनों में ही पूजा के लिए एक कलश में जल भर कर रख लें। पूजा के बाद अहोई माता की कथा सुनें और सुनाएँ। पूजा के पश्चात अपनी अपनी सास के पैर छुएँ और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। इसके पश्चात व्रती अन्न जल ग्रहण करती है।   संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें The post 2019 में अहोई अष्टमी कब है? जानें महत्व, कथा और पूजा विधि appeared first on AstroVidhi. ..read more
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 शुक्र का संबंध वैवाहिक जीवन, ऐशो आराम तथा सुख से होता है। शुक्र के प्रभाव से जातक को समस्त जीवन के सुखो की प्राप्ति होती है। शुक्र वृषभ और तुला राशि का स्वामी है, वही मीन उच्च तो कन्या नीच राशि मानी जाती है। शुक्र ग्रह जातक के किस भाव में बैठे है यह बहुत मायने रखता है। शुक्र लगभग एक महीने तक ही किसी राशि में रहते है, इसलिए शुक्र किसी राशि में जितने समय के लिए रहते है उस भाव के अनुसार जातक का भविष्यफल भी प्रभावित होता है। गोचर का समय 28 अक्टूबर सोमवार के दिन शुक्र प्रातः 8 बजकर 12 मिनिट पर शुक्र तुला राशि को छोड़कर वृश्चिक राशि में गोचर कर रहे है, शुक्र 21 नवम्बर बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजकर 4 मिनिट तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। शुक्र के गोचर का 12 राशियों पर प्रभाव  मेष राशि पर प्रभाव – शुक्र का राशि परिवर्तन आपकी राशि से अष्टम भाव में हो रहा है। इस भाव को आयुर्भाव भी कहा जाता है। कामकाज हो या व्यवसाय धन लाभ जरुर होगा। संतान का अच्छा सुख मिलेगा। यह गोचर आपके भाग्य को बदलने वाला है। स्वास्थ्य खराबी परेशानी का कारण बन सकता है। कामकाज हो या व्यवसाय धन लाभ जरुर होगा। छात्रों को इस गोचर में सफलता अवश्य मिलेगी। जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे है उनके लिए भी यह गोचर उत्तम है। इस समय खर्चों में वृद्धि होगी। मन में कामभावना उत्पन्न होंगी परन्तु अपने मन को काबू में रखना ही आपके हित में रहेगा। शत्रुओं से सावधान रहे। यात्रा करते समय सतर्क रहे। वृषभ राशि पर प्रभाव – शुक्र का राशि परिवर्तन आपकी राशि से सप्तम भाव में हो रहा है। आप अपनी तरफ से हमेशा प्रयत्नशील रहेंगे। धन हानि के संकेत मिल रहे है। यह गोचर आपके लिए सामान्य रहनेवाला है। पैसों का लेनदेन करते समय सावधानी बरते अन्यथा धोखा मिल सकता है। प्रोफेशनल क्षेत्र में आपको अच्छी सफलता मिल सकती है। इस गोचर के दौरान आपको सावधान रहने की सलाह यहाँ दी जाती है। गृहस्थ जीवन में किसी बात को लेकर मनमुटाव देखने को मिल सकता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर नाराजगी देखने को मिलेगी। कामकाज में उच्च पद पर विराजमान लोगों से सम्बन्ध खराब हो सकते है।   मिथुन राशि पर प्रभाव – शुक्र आपकी राशि से छठे भाव अर्थात शत्रु भाव में गोचर कर रहे है। यात्राएँ भी होंगी परन्तु वो फलदायी नहीं होंगी इसलिए यात्रा करने से परहेज करें। अगर छात्र मेहनत करते है तो अवश्य ही उनको मेहनत का फल मिलेगा। धन का दुरूपयोग हो सकता है, कर्ज जैसी स्थिति उत्पन्न होने के कारण मन में उदासीनता बनी रहेगी। स्वास्थ्य से सम्बंधित दिक्कते इस दौरान हो सकती है। अपने सेहत के प्रति जागरूक रहे। इस गोचर में कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है। दाम्पत्य जीवन में कलह बना रहेगा। कामकाज के क्षेत्र में किसी से विवाद हो सकता है। कर्क राशि पर प्रभाव – शुक्र आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहे है। प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में सफलता मिलेगी। धन प्राप्ति के नवीन अवसर मिलेंगे। सरकारी नौकरी की तलाश में जुटे लोगों को सरकारी नौकरी मिलने की सम्भावना है। धन की स्थिति उत्तम बनी रहेगी। बौद्धिक क्षमता का विकास होगा। इस गोचर में नवीनतम कार्य संपन्न होंगे तथा इस अवधि में संतान से भरपूर प्रेम तथा सम्मान मिलेगा। अगर किसी को पसंद करते है तो अपने प्यार का इजहार करने के लिए उत्तम समय है। प्रेम संबंधों में रोमांस बढ़ेगा। छात्रों के लिए यह गोचर अच्छा है। अभी ग्रह क्लेश शांति पूजा करवाएं सिंह राशि पर प्रभाव – शुक्र आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहे है। यह सुख का भाव होता है। अपने सगे-सम्बन्धियों का साथ मिलेगा। सुख-संपत्ति में इजाफ़ा होगा। कामकाज की तलाश में भटकने वाले लोगों को काम के नवीन अवसर मिलेंगे। अपने नियमित व्यवहार में मधुरता बनाए रखे, क्रोध न करें, समय आपके हित में रहेगा। यह गोचर प्रॉपर्टी या नवीन वाहन खरीदने के लिए उत्तम है। माता की सेहत उत्तम बनी रहेगी। पारिवारिक सुख की अनुभूती होगी। कोई काम अगर बहुत दिनों से अटका हुआ है तो वह इस गोचर में पूर्ण होगा।      कन्या राशि पर प्रभाव – तृतीय भाव में शुक्र का गोचर आपके धन में वृद्धि का कारण बनेगा। इसे सहज भाव कहते है। साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। समाज में मान -सम्मान बढेगा। सहकर्मी आपका भरपूर साथ देंगे। पारिवारिक सुख मिलेगा। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखे तथा किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहें। धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ेगी। कुल मिलाकर यह गोचर आपके लिए अच्छा है। यात्रा करते समय सावधनी बरतें। यदि आप विवाहित हैं तो आपके लिए, गोचर की ये अवधि खासतौर से कुछ ऐसे शुभ समाचार ला सकती है जिसका आपको लंबे समय से इंतजार रहा है। तुला राशि पर प्रभाव – शुक्र का यह गोचर आपकी राशि से द्वितीय भाव में हो रहा है। छात्र परिश्रम करना न छोड़े। धन प्राप्ति के अनेक अवसर इस गोचर में आपको मिलेंगे। महंगी चीजे आप इस गोचर में क्रय कर सकते है। खर्चे बढ़ेंगे उसी अनुपात में धन भी मिलेगा। प्रेम संबंधों के लिए बेहतर समय है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखनेवाले लोगों के लिए समय अनुकूल है। छात्रों को मेहनत का फल अवश्य मिलने वाला है। परिवार में प्यार और एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना देखने को मिलेगी। वृश्चिक राशि पर प्रभाव –  शुक्र का गोचर आपकी राशि में हो रहा है। यह गोचर जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ रहा है। आप ऐशो आराम की वस्तुओं पर ज्यादा धन खर्च करेंगे।  शत्रु आपसे भयभीत रहेंगे। आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहेगी। संतान सुख की प्राप्ति होगी। कामकाज में नयापन देखने को मिलेगा। छात्रों को मनवांछित फल मिलेंगे। यह शुक्र का गोचर तुला राशि के लोगों के लिए अच्छा है। नया घर या वाहन का क्रय होने की सम्भावना है वैवाहिक जीवन का आनंद उठाने के लिए कुछ समय के लिए आप दोनों छुट्टियों पर भी जा सकते हैं। धनु राशि पर प्रभाव – शुक्र का राशि परिवर्तन आपकी राशि से 12 वें भाव में हो रहा है। यह भाव व्यव भाव होता है। इस गोचर के दौरान धन लाभ होगा। खर्चों में भी वृद्धि होगी। आप भौतिक सुख-सुविधाओं का लाभ उठाएंगे। पति-पत्नी के बीच मधुर सम्बन्ध स्थापित होंगे। व्यापारियों को लाभ होगा। इस गोचर में विदेश यात्रा होने के संकेत मिल रहे है, लम्बी दूरी की यात्राएं भी होने की सम्भावना इस गोचर में बनी हुई है। अपने शत्रुओं से बचकर रहे यदि आप बिज़नेस की शुरुआत करने की इच्छा रखते हैं तो, इस क्षेत्र में निवेश कर आप भरपूर लाभ उठा सकते हैं। बिज़नेस के सिलसिले में लंबी यात्रा पर जाना भी हो सकता है।   मकर राशि पर प्रभाव – शुक्र का यह गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में हो रहा है। यह आमदनी का भाव कहा जाता है। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए यह गोचर अच्छा है। मित्रों का अच्छा सहयोग मिलेगा। उधार दिया हुआ धन वापिस आ सकता है। इस समय विभिन्न स्रोतों से धन का आगमन होगा। दाम्पत्य जीवन में सुख की अनुभूती होगी, रोमांस के लिए अच्छा समय है। पारिवारिक सुख मिलेगा। यात्रा करने के लिए भी समय अच्छा है। व्यवहार में विनम्रता रखें, बेवजह किसी से भी न उलझे। व्यापार-व्यवसाय में धन लाभ होगा। किसी पुराने मित्र से मिलकर मन प्रसन्न रहेगा। कुंभ राशि पर प्रभाव – शुक्र का यह गोचर आपकी राशि से दशम भाव में हो रहा है। इस गोचर में कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियों का निर्वाह अच्छे से करने में विफल हो सकते है। पैसों का लेनदेन करते समय सावधनी बरतें। अपने क्रोध पर नियंत्रण रखे। इस गोचर के दौरान शत्रुओं की संख्या में वृद्धि हो सकती है। पारिवारिक कलह मानसिक अशांति उत्पन्न कर सकते है। कामकाज में अपने सीनियर्स के साथ सम्बन्ध अच्छे रखे अन्यथा दिक्कते हो सकती है। कुंभ राशि के लोगों के लिए यह समय सामान्य रहने वाला है। मीन राशि पर प्रभाव – शुक्र का राशि परिवर्तन आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है। नवीन वस्तुओं का क्रय आपके द्वारा होगा। भाग्य का आपको भरपूर साथ मिलनेवाला है। धार्मिक कार्य में आपकी रूचि बन सकती है। आपकी सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी। किसी बात को लेकर असमंजस्य की स्थिति बनी रहेगी। धन का लेनदेन सोच-समझकर करें अन्यथा परेशानी उत्पन्न हो सकती है। रुका हुआ धन मिलने के संकेत मिल रहे है। यह गोचर छात्रों के लिए सफलता लेकर आ रहा है परन्तु परिश्रम की आवश्यकता है। अभी ग्रह क्लेश शांति पूजा करवाएं संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और 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करवा चौथ 2019 17 अक्टूबर – गुरूवार पूजा मुहूर्त- 17:50:03 से 18:58 ..read more
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दशहरा मुहूर्त अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दोपहर के बाद मनाया जाता है। इस काल की अवधि सूर्योदय के बाद दसवें मुहूर्त से लेकर बारहवें मुहूर्त तक की होती है। यदि दशमी दो दिन हो और केवल दूसरे ही दिन अपराह्नकाल को व्याप्त करे तो विजयादशमी दूसरे दिन मनाई जायेगी। यदि दशमी दो दिन के अपराह्नकाल में हो तो दशहरा पहले दिन मनाया जाएगा। दशहरा तिथि एवं मुहूर्त 8 अक्टूबर मंगलवार विजय मुहूर्त- 14:05:40 से 14:52:29 पूजा का समय- 13:18:52 से 15:39:18 तक भारतीय संस्कृति में हर त्यौहार का अपना एक अलग और ख़ास महत्व है और हर त्यौहार अपने साथ बेहतर जीवन जीने का एक अलग सन्देश देता है, उनमे से एक है दशहरा, जो दीवाली से ठीक बीस दिन पहले अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयादशमी के रूप में बहुत ही जोर-शोर से मनाया जाता है। यह पर्व असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है। यह पर्व भगवान श्री राम की कहानी तो कहता ही है, जिन्होंने लंका के अहंकारी राजा रावण को मार गिराया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करवाया। वहीं इस दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिए भी इसे विजयादशमी के रूप में बहुत ही जोर-शोर से मनाया जाता है और माँ दुर्गा की पूजा भी की जाती है। माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी माँ दुर्गा की पूजा कर शक्ति का आव्हान किया था। भगवान श्री राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिए रखे गये कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया। चूँकि श्री राम को राजीवनयन यानी कमल से नेत्रों वाला कहा जाता है इसलिए उन्होंने अपना एक नेत्र माँ को अर्पण करने का निर्णय लिया ज्यों ही वे अपना नेत्र निकलने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुई और विजयी होने का आशीर्वाद दिया। माना जाता है की इसके बाद दशमी के दिन प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया और भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस पर्व को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है। कुल्लू का दशहरा देश भर में काफी प्रसिद्ध है तो पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, त्रिपुरा सहित कई राज्यों में दुर्गा पूजा को भी इस दिन बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इस दिन बंगाल की सड़कों में हर तरफ भीड़ ही भीड़ दिखाई पड़ती है। दशमी के दिन माँ दुर्गा का विसर्जन किया जाता है और इस तरह से देवी दुर्गा अपने परिवार के पास वापस लौट जाती है। इस दिन पूजा करने वाले सभी लोग एक दूसरे के घर जाते है और एकदूसरे को शुभकामना देते है।  अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें विजयादशमी को अपराजिता पूजा का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, इस दिन अन्य पूजाओं का भी प्रावधान है जो की निम्न है:- दशहरे का दिन साल के सबसे पवित्र दिनों में से एक है। यह साढ़े तीन मुहूर्त में से एक है। (साल का सबसे शुभ मुहूर्त – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अश्विन शुक्ल दशमी, वैशाख शुक्ल तृतीया, एवं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (आधा मुहूर्त))। यह अवधि किसी भी नवीन कार्य की शुरुआत करने के लिए उत्तम होती है। जब सूर्यास्त होता है और आसमान में कुछ तारे दिखने लगते है तो यह अवधि विजय मुहूर्त कहलाती है इस मुहूर्त में पूजा करना उत्तम माना गया है। इस दिन शस्रों/आयुध की पूजा की जाती है, प्राचीन समय में ही यह परम्परा चली आ रही है। इस दिन सरस्वती की पूजा भी की जाते है, वैश्य अपने बहीखाते की आराधना इस दिन करते है। इस दिन बंगाल में दुर्गा पूजा बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाकर भगवान राम की जीत का जश्न मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है की इस दिन माँ भगवती जगदम्बा का अपराजिता स्रोत्र करना बड़ा ही पवित्र होता है। दशहरे के दिन ये काम करने से मिलता है पुण्य:- कहते है दशहरे के दिन यदि किसी भी भक्त को नीलकंठ नाम का पक्षी दिख जाए तो काफी शुभ होता है। कहते है नीलकंठ भगवान शिव का प्रतीक है, जिनके दर्शन मात्र से ही सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है। दशहरे के दिन गंगा स्नान करने को भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है। कहा जाता ही की दशहरे के दिन गंगा स्नान करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है, इसलिए दशहरे के दिन पुण्य प्राप्त करने के लिए लोग गंगा या अपने आसपास के किसी पवित्र नदी में स्नान करने जाते है। अभी अभिमंत्रित लहसुनिया रत्न प्राप्त करें संबधित अधिक जानकारी और दैनिक राशिफल पढने के लिए आप हमारे फेसबुक पेज को Like और Follow करें : Astrologer on Facebook The post दशहरा 2019- विजयादशमी तिथि एवं मुहूर्त appeared first on AstroVidhi. ..read more
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18 अक्टूबर 2019 शुक्रवार के दिन 12 बजकर 41 ..read more

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