हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य #241 ☆ आज ज़िंदगी : कल उम्मीद… ☆ डॉ. मुक्ता ☆
साहित्य एवं कला विमर्श
by Hemant Bawankar
3h ago
डॉ. मुक्ता (डा. मुक्ता जी हरियाणा साहित्य अकादमी की पूर्व निदेशक एवं माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत हैं। साप्ताहिक स्तम्भ “डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य” के माध्यम से  हम  आपको प्रत्येक शुक्रवार डॉ मुक्ता जी की उत्कृष्ट रचनाओं से रूबरू कराने का प्रयास करते हैं। आज प्रस्तुत है डॉ मुक्ता जी का  मानवीय जीवन पर आधारित एक विचारणीय आलेख आज ज़िंदगी : कल उम्मीद… । यह डॉ मुक्ता जी के जीवन के प्रति गंभीर चिंतन का दस्तावेज है। डॉ मुक्ता जी की  लेखनी को  ..read more
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हिंदी साहित्य – कविता ☆ माँ !! ☆ श्री आशीष गौड़ ☆
साहित्य एवं कला विमर्श
by Hemant Bawankar
3h ago
श्री आशीष गौड़ सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री आशीष गौड़ जी का साहित्यिक परिचय श्री आशीष जी के  ही शब्दों में “मुझे हिंदी साहित्य, हिंदी कविता और अंग्रेजी साहित्य पढ़ने का शौक है। मेरी पढ़ने की रुचि भारतीय और वैश्विक इतिहास, साहित्य और सिनेमा में है। मैं हिंदी कविता और हिंदी लघु कथाएँ लिखता हूँ। मैं अपने ब्लॉग से जुड़ा हुआ हूँ जहाँ मैं विभिन्न विषयों पर अपने हिंदी और अंग्रेजी निबंध और कविताएं रिकॉर्ड करता हूँ। मैंने 2019 में हिंदी कविता पर अपनी पहली और एकमात्र पुस्तक सर्द शब सुलगते  ख़्वाब  ..read more
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक समीक्षा ☆ संजय दृष्टि – कुएँ का पानी (काव्य संग्रह) – कवयित्री – अपर्णा कडसकर ☆ समीक्षक – श्री संजय भारद्वाज ☆
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by Hemant Bawankar
3h ago
श्री संजय भारद्वाज (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  ..read more
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English Literature – Poetry ☆ – “Smaller simpler things we ignore…”– ☆ Ms. Aparna Paranjape ☆
साहित्य एवं कला विमर्श
by Hemant Bawankar
3h ago
Ms. Aparna Paranjape Poetry ☆ – “Smaller simpler things we ignore…”– ☆ Ms. Aparna Paranjape ☆ (A poem from Ms. Aparna Paranjape’s book Divine meet.) ☆ Thinking that biggest we have to explore We want bigger more and more   Don’t like to enjoy on the sea shore Diving deep inside is the wish to explore   Want to surf want to dive deep To get the ultimate will to keep   Ignoring bud want to see flower full Wish to enjoy flower as tool   Sand pebbles sparkle on the shore Can give pleasure but  we feel bore!   Exploring heights we get wounds and hurts But ..read more
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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ अभी अभी # 423 ⇒ पार्टी/शन… ☆ श्री प्रदीप शर्मा ☆
साहित्य एवं कला विमर्श
by Hemant Bawankar
3h ago
श्री प्रदीप शर्मा (वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए साप्ताहिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “पार्टी/शन…“।) अभी अभी # 423 ⇒ पार्टी/शन… श्री प्रदीप शर्मा  ..read more
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ साहित्य निकुंज #241 ☆ भावना के दोहे – – मेघ ☆ डॉ. भावना शुक्ल ☆
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by Hemant Bawankar
3h ago
डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं भावना के दोहे – – मेघ।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # 241 – साहित्य निकुंज ☆ ☆ भावना के दोहे – मेघ ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆ ☆ घिरे मेघ अब कह रहे,  सुनो गीत मल्हार। बरसेंगे हम झूम के, नाचेगा संसार।। ** मेघ गरजते दे रहे, प्यारा सा संदेश। देखो साजन आ रहे, वापस अपने देश।। ** रिमझिम रिमझिम आ रही, है वर्षा की  ..read more
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ इंद्रधनुष #223 ☆ एक पूर्णिका – हमें  ऐतवार  है वफा  पर  अपनी… ☆ श्री संतोष नेमा “संतोष” ☆
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by Hemant Bawankar
3h ago
श्री संतोष नेमा “संतोष” (आदरणीय श्री संतोष नेमा जी  कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप  कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है एक पूर्णिका – हमें  ऐतवार  है वफा  पर  अपनी…। आप&nb ..read more
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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ विजय साहित्य # 230 ☆ कवी कालिदास दिन… ☆ कविराज विजय यशवंत सातपुते ☆
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by Hemant Bawankar
5h ago
कविराज विजय यशवंत सातपुते कवितेचा उत्सव # 230 – विजय साहित्य ☆ कवी कालिदास दिन… ☆ ☆ जोडोनीया दोन्ही कर, समर्पित शब्द फुले . स्वीकारावी शब्दार्चना , लाभू देत विश्व खुले. * कुलगुरु कालिदास , काव्य शास्त्र अनुभूती . शब्द संपदा संस्कृत, अभिजात कलाकृती. * महाकवी कालिदास , काव्य कला अविष्कार . निसर्गाचे सहा  ऋतू , ऋतू संहार साकार. * अलौकिक प्रेमकथा , मालविका अग्निमित्र. खंडकाव्य मेघदूत , सालंकृत शब्द चित्र. * शिव आणि पार्वतीची, कथा   कुमार संभव. अभिज्ञान शाकुंतल , प्रेमनाट्य शब्दोच्चय. * राजा पुरूरवा आणि , नृत्यांगना  ..read more
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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ निसर्गाचे रुप… ☆ सुश्री त्रिशला शहा ☆
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by Hemant Bawankar
5h ago
सुश्री त्रिशला शहा  कवितेचा उत्सव  ☆ निसर्गाचे रुप… ☆ सुश्री त्रिशला शहा ☆ ☆ असा कसा हा व्दाड निसर्ग क्षणात पालटी रुप आपले होती समोर नागमोडी वाट कशी हरवली आता धुक्यात * मेघ उतरले धरणीवरती दाटे काळोख सभोवती सुटे सोसाट्याचा वारा वाट कुठेच दिसेना * डोंगराच्या पायथ्याशी दिसे एक टपरी चहाची घेऊ चहासवे वाफाळत्या भाजीव कणसे आणि भजी * भुरभुर पावसाची चाले ढग हलके थोडे झाले धुके बाजूस सरले थोडे थोडे उजाडले * हरवलेली वाट धुक्यात आता दिसाया लागली दोन्ही बाजूच्या झाडातून नागमोडी चाललेली ☆ © सुश्री त्रिशला शहा मिरज   ..read more
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मराठी साहित्य – विविधा ☆ आठवणीने विसरा… ☆ सुश्री वर्षा बालगोपाल ☆
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by Hemant Bawankar
5h ago
सुश्री वर्षा बालगोपाल   विविधा  ☆ आठवणीने विसरा…  ☆ सुश्री वर्षा बालगोपाल  ..read more
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